जर्जर आवासों में रह रहे छह हजार लोगों के जीवन को खतरे में देखते हुए अमर उजाला ने पहले ही आगाह किया था। 18 जुलाई के अंक में संवाद न्यूज एजेंसी ने खबर प्रकाशित की थी, जिसमें आवास की स्थिति व लोगों की मजबूरी को उजागर किया था। इसके बाद भी प्रशासन नहीं चेता।
हाथरस में कांशीराम टाउनशिप के ब्लॉक नंबर 88 स्थित अपने आवास में सो रहे परिवार पर बुधवार देर रात करीब एक बजे छत का प्लास्टर भरभरा कर गिर गया। हादसे के समय महज सात वर्ष का कार्तिक अपनी गर्भवती मां गंगा शर्मा को बचाने के लिए उनके ऊपर आ गया। जो सीमेंट महिला के पेट पर गिरता, वह बच्चे के घुटने पर गिरा, जिसे उसे गंभीर चोट आई।
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हादसे में गंगा शर्मा औरउनके पति पवन शर्मा के पैर में चोट आई है। उनका पांच साल का बेटा शिवांश हादसे में बच गया। बृहस्पतिवार को बच्चे का सरकारी अस्पताल में उपचार कराया गया। हादसे के बाद भी पूरा परिवार उसी जर्जर आवास में रह रहा है। बारिश की वजह से परिवार दहशत में है। पवन की पत्नी गंगा छह महीने की गर्भवती हैं। पवन ने बताया कि यदि कार्तिक का पैर उनकी पत्नी के ऊपर नहीं होता तो कोई भी अनहोनी हो सकती थी। चोट के बावजूद बेटा मां का हाल पूछता रहा। यह बताते हुए आर्थिक कारण से जर्जर आवास में रहने को मजबूर माता-पिता की आंखें भर आईं।
पवन ने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूर हैं और यही उनके परिवार की जीविका का साधन है। हादसे के बाद पैर में चोट व बच्चों को घर में अकेला छोड़ने के डर से वे काम पर नहीं जा पा रहे हैं। हादसे के बाद बृहस्पतिवार की दोपहर परिवार डीएम से मिलने कलक्ट्रेट गया था, जिससे इस डर से मुक्ति मिल जाए। पर व्यस्त कार्यक्रम के चलते वे मिल नहीं पाए। मजबूरी में परिवार उसी जर्जर आवास में रह रहा है। रात को तीसरी मंजिल की बालकॉनी में बिस्तर डालकर सो रहे हैं। खुले में सोने से सीढि़यों पर गिरने का डर है, इसलिए बच्चे सोते हैं और माता-पिता झपकी ही ले पाते हैं।
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पहले ही किया था आगाह
जर्जर आवासों में रह रहे छह हजार लोगों के जीवन को खतरे में देखते हुए अमर उजाला ने पहले ही आगाह किया था। 18 जुलाई 2026 के अंक में संवाद न्यूज एजेंसी ने खबर प्रकाशित की थी, जिसमें आवास की स्थिति व लोगों की मजबूरी को उजागर किया था। इसके बाद भी प्रशासन नहीं चेता।