कैलोरा से बरवाना मार्ग का निर्माण महज दो साल पहले हुआ है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में 19 करोड़ रुपये से इसको बनाया गया था। इसी सड़क के गड्ढों ने मंगलवार को तीन लोगों की जान ले ली। अगर सड़क ठीक होती तो शायद ये तीन जानें न जातीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि सेंगर नदी का पुल भी गड्ढों की वजह से बीचोंबीच से धंस रहा है। जिसकी मरम्मत होना बहुत जरूरी है।
मंगलवार की सुबह कार चालक के सामने आए गड्ढे से बचने के चलते सड़क हादसा हुआ। मात्र दो साल पहले बनी सड़क में अगर गड्ढे हैं तो इसकी निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठना गलत नहीं है। ऐसा नहीं कि इस सड़क पर सिर्फ एक ही गड्ढा है। यहां दर्जनों गड्ढे हैं, लेकिन अधिकारियों का इस पर ध्यान नहीं है। जिम्मेदार आंख मूंदकर बैैठे हैं। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं कि गड्ढों के कारण सड़क हादसे हो रहे हैं। पुल की हालत भी खराब है।
सड़क जर्जर हो चुकी है। सेंगर नदी के पुल को भी मरम्मत की दरकार है। कई बार शिकायत करने के बाद पुल पर मिट्टी डाली गई, इसे ठीक किया गया, लेकिन पुल बीच से धंस रहा है। अब कोई सुनने वाला नहीं है। -चंद्रपाल, निवासी गांव नगला मया।
इस पुल को मनमाने तरीके से बनाया गया। उस समय इसका विरोध भी किया गया था, लेकिन ग्रामीणों की बात किसी ने नहीं सुनी। इसके कारण ही आज यह गड्ढे हादसों का सबब बन रहे हैं। -मनोज कुमार, निवासी महौ।
यह घटना यहां मौजूद गड्ढों की वजह से हुई है। ईको कार चालक गड्ढे से बच रहा था। उसी वक्त आमने सामने की भिड़ंत हो गई है। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई। -सतेंद्र कुमार, मौके पर मौजूद राहगीर।
बघराया के निकट सेंगर नदी का पुल कुछ दिन पहले धंस गया था। इसमें गड्ढे हो गए हैं। इन गड्ढों से बचने के कारण घटना हुई है। पहले भी घटनाएं हो चुकी हैं। -मुंशी सिंह, मौकै पर मौजूद राहगीर।
यह सड़क प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में बनी है। जेई को भेज कर सड़क की जानकारी ली गई है। नदी के पुल पर जहां गड्ढे हैं, वहां मरम्मत होगी। अगर पुल धंसा है तो उसे ठीक कराया जाएगा। अक्सर तेज गति भी दुर्घटनाओं का कारण बनती है। मैं खुद इस सड़क का मुआयना करने के लिए जाऊंगा। -संजीव कुमार वर्मा, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी।