जिले में जन सेवा केंद्रों के माध्यम से राजस्व सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन ने तीन नए विशेष पोर्टल शुरू किए हैं। इनके माध्यम से अब आम जनता को जमीन से जुड़े काम और प्रमाणपत्र बनवाने के लिए बार-बार तहसीलों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।
जिले में संचालित जनसेवा केंद्रों पर नागरिक इन नई सुविधाओं का लाभ ले सकेंगे। इन पोर्टल का उद्देश्य नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और विवाद मुक्त सेवाएं देना है। ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के लोग अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र पर जाकर इन सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।
धारा 116 पोर्टल (भूमि विभाजन प्रक्रिया हुई आसान)
ऑनलाइन आवेदन : भूमि के बंटवारे या विभाजन के लिए अब सीधे पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा।
डिजिटल प्रक्रिया : नोटिस, उद्घोषणा और रिपोर्ट तैयार करने का काम अब पूरी तरह डिजिटल माध्यम से होगा।
जीआईएस तकनीक का उपयोग : जीआईएस से भूमि की सटीक भौगोलिक स्थिति देखना और जांचना आसान हो जाएगा।
ईडब्ल्यूएस पोर्टल (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए राहत)
ऑनलाइन आवेदन : आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग प्रमाणपत्र के लिए अब पारदर्शी व्यवस्था के तहत ऑनलाइन आवेदन होगा।
डिजिटल निस्तारण : लेखपाल और तहसीलदार स्तर पर आवेदनों का निस्तारण पूरी तरह डिजिटल प्रणाली से किया जाएगा।
ऑनलाइन ट्रैकिंग : आवेदक अपने आवेदन की स्थिति और प्रगति की ऑनलाइन निगरानी घर बैठे या जनसेवा केंद्र से कर सकेंगे।
सरलीकृत खतौनी पोर्टल
क्षेत्रफल : खतौनी में अब भूमि का क्षेत्रफल दशमलव के 6 अंकों तक प्रदर्शित होगा।
सटीक जानकारी : छोटे भूखंडों (प्लाटों) की नाप-जोख और जानकारी अब अत्यधिक सटीक होगी, जिससे सीमा विवादों में कमी आएगी।
पुराने रिकॉर्ड्स को समझना आसान : पुरानी हस्तलिखित खतौनी और जटिल रिकॉर्ड्स को अब आसान और स्पष्ट डिजिटल प्रारूप में समझा जा सकेगा।
अब आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग के प्रमाण सहित दो अन्य सेवाओं को ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ दिया गया है। आवेदक जन सेवा केंद्रों के जरिये इन कार्याें के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। तहसील व अन्य कार्यालयों में चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी। -अतुल वत्स, जिलाधिकारी।