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Hathras News: 40 साल से रावण के पुतले बना रहे रेशमपाल

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जट्टारी में रावण का पुतला बनाते रेशमपाल। संवाद  - फोटो : samvad
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होली वाला मोहल्ला निवासी 60 वर्षीय रेशमपाल करीब 40 वर्षों से रावण के पुतले बना रहे हैं। उन्होंने यह हुनर अपने पिता मवासीराम से सीखा। उनके दादा भी यही काम करते थे। 1985 में उन्होंने गाजियाबाद के विजयनगर में 2900 रुपये में पहला पुतला बनाया था।
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इस बार जट्टारी में रावण और मेघनाद के पुतले बनाने की 1.16 लाख रुपये मजदूरी ली है। छह कारीगरों ने 25 दिन में दोनों पुतले तैयार किए। वह यहां करीब नौ वर्षों से पुतले बना रहे हैं। रेशमपाल का कहना है कि पहले मेलों में लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। अब मोबाइल ने मेलों की रौनक कम कर दी है। पुतला देखने के लिए भीड़ जुटती है, लेकिन इसे बनाने वाले कारीगरों की चर्चा नहीं होती। यही उनकी पीड़ा है। अब वह अपनी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके बेटे अमित कुमार, अंकित कुमार और बबीत कुमार भी इस काम में हाथ बंटाते हैं।
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