मामले की जानकारी देती एडीएम रेखा चौहान, एसडीएम ज्योत्स्ना बंधु।
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नगर पालिका के सुपर सेशन काल में पिछले वर्ष नाला सफाई के नाम पर हुए फर्जीवाड़े में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी समेत कई अफसर, ठेकेदार और कर्मचारी फंस गए हैं। नौ लाख रुपये के इस गोलमाल में जिला प्रशासन ने शासन को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेज दी है। नगर पालिका के पूर्व ईओ, जेई, सेनेटरी इंस्पेक्टर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता और नगर पालिका लिपिक के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन ने शासन को रिपोर्ट भेज दी है।
नगर पालिका के ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करने के अलावा सफाई नायक और लिपिकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए चेयरमैन को लिखा गया है। इनके खिलाफ एफआईआर कराने की संस्तुति की गई है। प्रशासन की इस सख्ती से नगर पालिका सिकंदराराऊ में खलबली मच गई है।
एडीएम रेखा एस चौहान ने बताया कि नगर पालिका के 10 नालों की सफाई के लिए गत वर्ष 16 जून को टेंडर आमंत्रित किए गए थे। पहले तो इस काम के लिए नियमानुसार ई-टेंडरिंग प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। टेंडर होने के बाद ठेका श्रीकृष्ण एंड कंपनी को दे दिया गया। कार्य समाप्त होने की समय सीमा 15 जुलाई थी। इस दौरान इस भुगतान को तत्कालीन ईओ दीपिका शुक्ला ने समय बढ़ाने की अनुमति के बिना नगर पालिका के जेई निर्माण ने एमवी बनवा दी।
तत्कालीन ईओ ने बिना निरीक्षण किए ही इस काम का भुगतान करा दिया। मामले की शिकायत के पश्चात डीएम अमित कुमार सिंह ने सक्षम अधिकरियों से इस प्रकरण की जांच कराई तो कच्चा-चिट्ठा खुल गया। जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे नाला सफाई के नाम पर सरकारी धनराशि का गबन करने की आशंका पुख्ता हो रही है। अब डीएम के निर्देश पर शासन को लिखा गया है कि नगर पालिका के दोनों जेई, एई पीडब्लूडी व ईओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाए। एडीएम ने बताया कि इस मामले से जुड़े नगर पालिका के ठेकदार को ब्लैक लिस्टेड किया जा रहा है। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।