बीस नवंबर से लेकर 17 दिसंबर जिले में छह स्थानों पर नहर व रजबहा की पटरी की कट चुकी है। इस वजह से करीब 100 किसानों की छह सौ बीघा फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो चुकी है। सहपऊ क्षेत्र में माइनरों के ओवरफ्लो होने की वजह से पानी खेतों में पहुंच गया था। कलवारी निवासी यदुवीर सिंह, राजू निवासी कैमार, तमना गढ़ी निवासी राजीव और जोगिया निवासी अमित पौरुष का कहना है कि सिंचाई विभाग नहरों की मरम्मत नहीं कराता है। जगह जगह से टूट जाती हैं। इससे किसानों की फसलें चौपट हो जाती हैं। किसानों को मुआवजा तक नहीं मिलता है।
गांव अहवरनुपर व मुरसान के गांव उदयभान में नहर की पटरी कटने से करीब 400 बीघा आलू, गेहूं व सरसों की फसल बर्बाद हुई है। अफसरों का कहना है कि किसान अपने खेतों में सिंचाई के लिए पटरियों के नीचे छेद कर कुलावे लगाते हैं। इसके बाद जब मिट्टी में नमी होती है , तो मिट्टी धीरे टूट जाती है और पानी का बहाव खेतों की ओर हो जाता है। विभाग की मानें तो नहर की दीवारों में चूहे व सेही बिल बना लेते हैं। इस कारण पानी इन बिलों में से होकर रिस जाता है।
नहर व माइनरों में कुलावे लगाए जाते हैं, इसकी वजह से चूहे व सेही भी बिल बना लेते हैं। जब तेजी से पानी आता है तो माइनर व नहरों के कटने की संभावना बनी रहती है। इस वर्ष में करीब 20 किसानों ने अवैध कुलावे काटने के मामले में मुकदमा दर्ज हुए हैं।-बलजीत सिंह, एक्सईन, सिंचाई विभाग।