टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जिले ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए प्रदेश स्तर पर अपनी धाक जमाई है। आधिकारिक टीबी स्कोर कार्ड में हाथरस जिले ने 97.7 अंकों के साथ पूरे उत्तर प्रदेश में तीसरे और अलीगढ़ मंडल में पहला स्थान हासिल किया है।
जिले ने पांच बिंदुओं पर सफलता हासिल की। जिले ने सरकारी व निजी स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से कुल 4,900 के वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष 3,437 टीबी मरीजों को खोजकर नोटीफाई किया। इस तरह सरकारी क्षेत्र में 72 फीसदी और निजी क्षेत्र में 66 फीसदी उपलब्धि प्राप्त की। एचआईवी से पीड़ित सभी 81 पात्र मरीजों को शत-प्रतिशत टीबी निवारक उपचार (टीबीटी) प्रदान किया गया, जिसमें जिले को पूरे अंक (पांच में से पांच) मिले।
बैक्टीरियोलॉजिकल जांच : कुल 1,310 पुष्ट टीबी मरीजों में से 1,293 मरीजों में रिफैम्पिसिन रेजिस्टेंस की जांच उपलब्ध कराई गई, जिसका वैध परिणाम 99 फीसदी रहा। पिछले वर्ष के समूह में पंजीकृत 3,710 मरीजों में से 3,596 मरीजों का इलाज पूरी तरह सफल रहा। 97 फीसदी सफलता स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के निरंतर प्रयास को दर्शाता है।
डीआर-टीबी उपचार : निदान किए गए 103 ड्रग रेजिस्टेंट टीबी मरीजों में से 97 मरीजों (94 फीसदी) का त्वरित उपचार शुरू कराया गया।
घरेलू संपर्कों की सुरक्षा (टीपीटी) : मरीजों के घर के 5,607 सदस्यों की पहचान कर 4,814 पात्र व्यक्तियों (86 फीसदी) को टीबी निवारक उपचार (टीपीटी) प्रदान किया गया।
अलीगढ़ मंडल के चारों जिलों के प्रदर्शन की तुलना
-हाथरस : प्रदेश में तीसरी रैंक (97.7 स्कोर)
-कासगंज :प्रदेश में 17वीं रैंक (95.3 स्कोर)
-अलीगढ़ : प्रदेश में 26वीं रैंक (94.6 स्कोर)
-एटा : प्रदेश में 73वीं रैंक (87.3 स्कोर)
यह सफलता चिकित्सक, टीबी इकाइयों, लैब स्टाफ, एसटीएस, एसटीएलएस, टीबी हेल्थ विजिटर्स और आशा कार्यकर्ताओं के उत्कृष्ट सामूहिक प्रयास का नतीजा है। जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए उपलब्ध संसाधनों में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
-डाॅ. प्रवीण भारती, जिला क्षय रोग अधिकारी