मीडिया से बात करते राहुल गांधी
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संसद में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी 5 जुलाई को हाथरस हादसे के मृतकों के परिजनों के पास संवेदना जताने पहुंचे। उन्होंने अलीगढ़-हाथरस में पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर घटनाक्रम जाना। भावुक होकर कहा, ये बेहद गरीब परिवार हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इन पीड़ितों की मदद के लिए दिल खोल कर मुआवजा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन की कमियों से यह हादसा हुआ है। उन खामियों को उजागर करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।
हाथरस के सिकंदराराऊ में 2 जुलाई को सत्संग के बाद मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई थी। यह हादसा उसी दिन से देशभर में सुर्खियों में है। सियासी दलों के दिग्गज नेताओं की आवाजाही जारी है। शुक्रवार सुबह सात बजे राहुल गांधी अकराबाद के कस्बा पिलखना पहुंचे, जहां हादसे में मृत चार लोगों के परिजनों से मुलाकात की।
इस दौरान उन्होंने परिजनों से घटनाक्रम पर बात करते हुए उनकी समस्याओं और शिकायतों को जाना। अपनी तरफ से भरोसा दिलाया कि अब वह आ गए हैं। हर कदम पर उनके साथ खड़े हैं। किसी भी तरह की लापरवाही या अनदेखी नहीं होने दी जाएगी। इसके बाद वह हाथरस के विभव नगर कालोनी के ग्रीनपार्क पहुंचे और वहां भी मृतकों के परिजनों से मिले। उन्होंने परिवारों का दुख-दर्द को साझा किया। वही वादा दोहराया। इस मौके पर उनके साथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, राष्ट्रीय महासचिव/प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय, सांसद इमरान मसूद, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत, पूर्व विधायक विवेक बंसल, प्रदीप माथुर आदि मौजूद रहे।
बाबा पर चुप्पी, मुआवजे पर दिल खोलने की वकालत
हाथरस में पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत की। मीडिया की ओर से बाबा से जुड़े सवालों पर वह चुप्पी साधे रहे। मगर इन गरीब परिवारों को वर्तमान में जल्द से जल्द बड़े मुआवजे की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कहा कि यह हादसा बेहद दुखद है। परिवारों को बहुत नुकसान हुआ है। परिवार से बातचीत में सामने आया है कि प्रशासन की कमियों व गलतियों की वजह से हादसा हुआ है। इसकी तह में जाना चाहिए। साथ ही, परिवारों को मुआवजा सही तरीके से मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मैं यूपी के मुख्यमंत्री से कहना चाहूंगा कि ये परिवार मुश्किल घड़ी में हैं और बेहद गरीब हैं। दिल खोलकर मृतकों के परिजनों को मुआवजा दें। उन्हें मुआवजे की विशेष जरूरत है। ऐसा न हो कि छह माह और साल भर बाद मुआवजा दिया जाए तो उस समय के हालत अलग होंगे। परिजनों से व्यक्तिगत बात हुई है। उन्होंने प्रशासन की कमियों की वजह से हादसा होना बताया है। बोले- आयोजन में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध नहीं थे।