नीट की तैयारी कर रही खुशी की मौत पर मंगलवार की सुबह व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा। अंत्येष्टि के बाद व्यापारी एकत्रित होकर कोतवाली सदर के सामने पहुंच गए और पुल के ढलान पर मानव शृंखला के जरिये डिवाइडर बनाकर विरोध जताया।
जाम लगाने के बजाय उन्होंने प्रशासन को जगाने के लिए यह तरीका अपनाया। आक्रोशित लोगों ने हत्यारे पुल को सही करो व खूनी पुल को सही करो, जैसे नारे भी लगाए। वहां से गुजर रहे वाहन चालक भी यह नजारा देखकर असमंजस में पड़ गए कि यह हो क्या रहा है। इस दौरान थोड़ी देर के लिए जाम की स्थिति भी बनी।
इनमें से ही कुछ व्यापारियों ने फिर वाहनों को निकलवाया। इधर व्यापारियों के सड़क पर उतरने की जानकारी पर शहर कोतवाल व महिला थाना पुलिस पहुंच गई और उन्हें समझाने का प्रयास करने लगे। उप जिलाधिकारी सदर व पुलिस ने मौके पर पहुंचकर व्यापारियों को समझाया और कोतवाली में बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा की।
व्यापारियों का कहना था कि शहर के यातायात के दृष्टिकोण से फ्लाईओवर में भारी कमियां हैं। इस कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। जब प्रशासन फेल साबित हो रहा है तो अब वे लोग इस तरह यातायात को नियंत्रित करेंगे, जिससे कोई और परिवार अपने बच्चे को न खोए। तीखे मोड़, गड्ढे व पुलिस की लापरवाही पर व्यापारी जमकर बरसे।
ओवरटेक करती आई सीएमओ की गाड़ी, बिफरे व्यापारी
जब पुलिस से बहस चल रही तो पुल पर वाहनों की कतार लग गई। इस बीच मुख्य चिकित्सा अधिकारी की गाड़ी हूटर देते हुए गलत साइड से नीचे आने लगी। इस पर व्यापारी शहर कोतवाल को इशारा करते हुए नाराजगी जाहिर करने लगे। बोले कि अधिकारियों की इसी जल्दबाजी को देख आम लोग भी उनके पीछे हो लेते हैं। व्यापारियों के गुस्से को देखते हुए सीएमओ की गाड़ी को सीधे निकाल दिया गया।
उपजिलाधिकारी के सामने लगे नारे
कोतवाली सदर में एसडीएम सदर राजबहादुर सिंह के पहुंचते ही व्यापारियों ने नारे लगाने शुरू कर दिए। एसडीएम, तहसीलदार व कोतवाल ने व्यापारियों की बात सुनी और उनकी मांगें लिखित में लेकर समाधान का आश्वासन दिया। व्यापारी नेता विपुल सिंघानिया ने कहा कि वे जल्द ही इस संबंध में जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक से भी मिलेंगे।
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लंबाई घटाई, चौड़ाई भी रह गई कम
शहर के व्यस्ततम तालाब चौराहा रेलवे फाटक पर वर्ष 2019 में फ्लाईओवर मंजूर हुआ था। 15 साल पुरानी मांग तो पूरी हो गई, लेकिन यहां से गुजरने वाले वाहनों की क्षमता के अनुरूप पुल का निर्माण नहीं हो सका। 26 करोड़ की लागत से बने इस पुल की लंबाई 650 मीटर प्रस्तावित थी, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप से इसे घटाकर 550 मीटर कर दिया गया। नतीजा, पुल का ढलान तीखा हो गया, जिससे मोड़ पर दिक्कतें आती हैं। सड़क की चौड़ाई 10 मीटर है, जबकि पुल की मात्र सात मीटर। रोजाना हजारों वाहनों के निकलने के बावजूद इसकी चौड़ाई पर प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।
व्यापारियों में आक्रोश
फ्लाईओवर खूनी पुल का रूप ले चुका है। एक होनहार बेटी की जान जाना सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक व यातायात व्यवस्था की घोर विफलता है। जब तक ओवरब्रिज पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक नहीं लगेगी और ट्रैफिक पुलिस की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक व्यापार मंडल शांत नहीं बैठेगा।
-राजीव वार्ष्णेय, संयुक्त उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल
पुल पर हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। यदि समय रहते यातायात नियंत्रण के कड़े कदम उठाए गए होते तो आज उस होनहार बेटी की जान नहीं जाती। हम दोषी ट्रैक्टर चालक पर सख्त कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग करते हैं।
-कन्हैया वार्ष्णेय, व्यापारी नेता
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व्यापार मंडल की प्रमुख मांगें
-दुर्घटना करने वाले ट्रैक्टर चालक को तत्काल गिरफ्तार कर उसके विरुद्ध गैर इरादतन हत्या की धारा में कठोरतम वैधानिक कार्रवाई की जाए।
-फ्लाईओवर पर ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने वाले यातायात पुलिसकर्मियों व होमगार्ड जवानों की जांच कराकर उन्हें निलंबित किया जाए।
-व्यस्ततम समय में फ्लाईओवर पर ट्रैक्टर-ट्रॉली, डंपर एवं अन्य भारी कॉमर्शियल वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
-पुल के दोनों छोरों पर स्थायी ट्रैफिक पुलिस बूथ स्थापित कर 24 घंटे मुस्तैद सिपाहियों की तैनाती की जाए।
-पुल पर स्पीड लिमिट बोर्ड, सीसीटीवी कैमरे और गति-नियंत्रक उपाय तुरंत लागू किए जाएं।
-मृतक छात्रा के परिवार को शासन द्वारा उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए।