शहर के रामलीला मैदान में अवैध कब्जों के विरोध में चल रहा समाजसेवी संजय पाराशर चुन्नू पंडित की भूख हड़ताल शनिवार को एकाएक राजनीतिक सुर्खियों में आ गई। एक नहीं, बल्कि जिले के दो विधायक इस हड़ताल को खत्म कराने पहुुंचे।
सबसे पहले सदर विधायक हरीशंकर माहौर ने अनशन स्थल पर पहुंचकर चुन्नू पंडित की समस्याओं को विस्तार से सुना और आश्वस्त किया कि रामलीला मैदान में हो रहे कब्जे की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी और कोई भी नया कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। इसके बाद विधायक ने अपने हाथों से चुन्नू पंडित को जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म करा दिया।
कुछ देर बाद ही सादाबाद विधायक व पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय भी अनशन स्थल पर पहुंचे और चुन्नू पंडित की समस्याएं सुनीं। जिन लोगों पर कब्जा करने का आरोप लग रहा था, उन्हें सामने बुलाकर पूर्व मंत्री ने साफ कह दिया कि रामलीला की जगह धार्मिक है। इस पर किसी तरह का कब्जा नहीं किया जाए। इसके बाद चुन्नू पंडित ने अनशन खत्म करने की घोषणा कर दी। दरअसल, पिछले चार दिन से चुन्नू पंडित रामलीला मैदान में अपने काफी समर्थकों के साथ भूख हड़ताल कर रहे थे। उनकी मांग थी कि रामलीला मैदान में हो रहे अवैध कब्जों को रोका जाए और अब तक जो कब्जे किए गए हैं, उन्हें हटवाया जाए।
वह कामेश्वर संस्कृत महाविद्यालय की भी जांच कराने की मांग कर रहे थे। हालांकि कोतवाली पुलिस ने दो बार उनसे अनशन खत्म कराने के लिए वार्ता की, लेकिन उन्होंने साफ कह दिया कि जब तक उन्हें उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलेगा, वह अनशन से नहीं उठेंगे। शुक्रवार को उनके स्वास्थ्य में गिरावट भी दर्ज की गई थी, जिसके बाद शनिवार को सदर विधायक हरीशंकर माहौर पूरे प्रशासनिक अमले के साथ रामलीला मैदान पहुंचे।
उन्होंने चुन्नू पंडित से विस्तार से वार्ता की। उनके मांग पत्र को भी पढ़ा और आश्वस्त किया कि रामलीला मैदान में हो रहे सभी कब्जों की जांच होगी। इस मौके पर एसडीएम सदर अमिताभ यादव, तहसीलदार कमलेश गोयल भी उनके साथ थे। अधिकारियों ने मौके पर हो रहे निर्माण को हटवा दिया और हिदायत दी कि अब यहां बिना अनुमति के कोई भी निर्माण कतई नहीं किया जाए। कुछ देर बाद पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय भी पहुंचे और उन्होंने भी चुन्नू पंडित की मांगों का समर्थन किया। उन्हें पानी पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। चुन्नू पंडित ने चेतावनी दी कि अगर 15 दिन में रामलीला मैदान समेत शहर में अन्य जगहों पर हो रहे अवैध कब्जे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप नहीं हटवाए गए तो 16वें दिन से वह लखनऊ में सीएम आवास पर आमरण अनशन शुरू कर देंगे।