खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित होने और सरकारी खरीद की तारीखों का ढोल पीटने के बावजूद धरातल पर प्रशासनिक तैयारियां हवा-हवाई साबित हो रही हैं। शासन के आदेशानुसार 1 अक्तूबर से मक्का और बाजरे की सरकारी खरीद शुरू होनी थी। संवाद न्यूज एजेंसी ने पड़ताल में पाया कि पहले ही दिन जिले के कई क्रय केंद्रों ताले लटके थे। कहीं भी खरीद से जुड़ा बैनर तक नहीं था। प्रचार-प्रसार न होने से बहुत से किसान इन केंद्रों को ढूंढ ही नहीं पा रहे थे।
पड़ताल में जिले के सभी आठ क्रय केंद्रों पर पहले ही दिन सन्नाटा पसरा मिला। केंद्रों पर किसानों के बैठने या पेयजल की व्यवस्था नहीं दिखी। फसल तौलने के लिए कांटा, बोरे या सफाई उपकरणों का भी कोई प्रबंध नहीं था। तैयारियों के अभाव में सरकारी खरीद व्यवस्था पहले ही दिन पूरी तरह पटरी से उतरी नजर आई।
औने-पौने दाम पर उपज बेच रहे किसान
किसान धान, मक्का और बाजरे की उपज लेकर मंडियों में पहुंचने लगे हैं। सरकारी खरीद चालू न होने और केंद्रों का अता-पता न होने के कारण किसान आढ़तियों के हाथों औने-पौने दाम पर अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि जब सरकार ने समर्थन मूल्य और तारीखों का एलान कर दिया था, तो वक्त पर इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
बिना लक्ष्य के कैसी खरीद
हैरानी की बात यह है कि बिना किसी तय लक्ष्य के ही खरीद शुरू करने की घोषणा हो चुकी है। जिला विपणन विभाग को शासन से अब तक खरीद का अंतिम लक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है। यही हाल 15 अक्तूबर से शुरू होने वाली धान खरीद का भी है। स्पष्ट दिशा-निर्देश और लक्ष्य न होने का बहाना बनाकर अधिकारी भी सुस्त रवैया अपनाए हुए हैं।
फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य / प्रति क्विंटल
बाजरा : 2,900 रुपये
धान : 2,441 रुपये
मक्का : 2,400 रुपये
नोट : जिले में इस बार कुल 8 क्रय केंद्र बनाए गए हैं।
अभी शासन से खरीद का लक्ष्य नहीं मिला है। जिले में आज से मक्का व बाजरे की खरीद शुरू होनी थी। अभी केंद्रों को तैयार किया जा रहा है। एक सप्ताह में क्रय केंद्र क्रियाशील हो जाएंगे।
-कमला प्रसाद यादव, जिला खाद्य विपणन अधिकारी