शासन द्वारा निरक्षर बच्चाें को पढ़ाने के लिए स्कूल चलो अभियान और जागरूकता रैली निकाली गई, लेकिन नयाबांस पूर्व माध्यमिक विद्यालय में इन सबका कोई मतलब नहीं दिख रहा। यह स्कूल प्रधान और हेडमास्टर के विवाद का अखाड़ा बन गया है।
इसका खामियाजा स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से लेकर एमडीएम वितरण और अन्य योजनाओं पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि यदि एक-दो दिन में इस मामले का निपटारा नहीं हुआ तो वह अपने बच्चों को स्कूल से निकालने को मजबूर होंगे।
फिलहाल स्कूल की रसोइया, राशन डीलर और ग्राम प्रधान ने हेडमास्टर के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
बुधवार को प्रधानाध्यापिका अवकाश पर रहीं। रसोई की चाभी भी उनके पास थी, जिससे बच्चों के लिए एमडीएम नहीं बन सका। ग्राम प्रधान की मानें तो बाद में उन्होंने अपने पैसों से बिस्किट मंगवाकर बच्चों को वितरित कराए।
कक्षा सात के बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं और फर्नीचर एक क्लास में पड़ा हुआ है। अभिभावकों का यह भी आरोप था कि बच्चों को दो साल से यूनिफॉर्म भी नहीं मिली है।
अनोखी देवी, प्रभारी प्रधानाध्यापिका कहती हैं कि हमको एमडीएम बनवाने में कोई दिक्कत नहीं है। आज प्रधानाध्यापिका अवकाश पर हैं और रसोई की चाभी भी उन्हीं के पास है। रसोई में ताला लगा हुआ है तो एमडीएम कैसे बनवाते।
उध्ार ग्राम प्रधान नया बांस मेहराजुद्दीन कहते हैं कि प्रधानाध्यापिका दबंगई दिखाती हैं। इस संबंध में दो बार डीएम और तीन बार बीएसए से शिकायत कर चुका हूं। जब भी एमडीएम नहीं बंटता मैं अपने पैसे से बच्चों को बिस्किट बंटवा देता हूं। -,