फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र मामले में फंस रहे नगर पालिका कर्मी अब लीपापोती का प्रयास कर रहे हैं। मृतक की पत्नी के नाम से एक प्रार्थना पत्र ले लिया गया है, जिसके आधार पर प्रमाणपत्र के निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। नगर पालिका ईओ ने प्रकरण में जिम्मेदार कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा है।
गौरतलब है कि नगर पालिका में कुलदीप नाम के शख्स के नाम से मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किया गया। उनकी वास्तविक मृत्यु की तिथि 19 अगस्त थी, जबकि प्रमाणपत्र में उनकी मृत्यु की तारीख 16 अक्तूबर दर्शाई गई थी। नगर पालिका से पांच नवंबर को यह प्रमाण पत्र जारी हुआ था। इसके लिए लगाया गया मृत्यु सूचना पत्र आधा-अधूरा भरा गया। इसमें मृत्यु का स्थान स्पष्ट नहीं है। जिला अस्पताल का कोई जिक्र नहीं है, लेकिन मृत्यु की तारीख 16 अक्तूबर अंकित है।
यहां सूचना देने वाले का नाम राधा देवी है और पते के नीचे जो फोन नंबर लिखा गया है, वह किसी अन्य व्यक्ति का है। पत्र पर सूचना देने वाले के न हस्ताक्षर हैं और न ही अंगूठा लगाया गया। इस प्रपत्र से ही साफ है कि नियमों को ताक पर रखकर प्रमाणपत्र जारी किया गया। संदिग्ध मौत के मामले में जब पता चला कि दो पक्ष प्रमाणपत्र जारी कराने के लिए लगे हुए हैं तो यह मामला खुला।
ऐसे में आनन-फानन राधा देवी के नाम से 18 नवंबर को एक प्रार्थना पत्र लिया गया, जिसमें उल्लेख कराया गया कि मृत्यु की तिथि गलत हो गई है। इस पत्र के आधार पर इस प्रमाणपत्र को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरु कर दी गई है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहित सिंह का कहना है कि प्रकरण में जांच की जा रही है। जिम्मेदार कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।