शहर के कई इलाकों में रविवार को विद्युत आपूर्ति बाधित रही। एक तरफ बिजली निगम द्वारा पूर्व निर्धारित शेड्यूल के तहत कांशीराम टाउनशिप उपकेंद्र पर मरम्मत का कार्य कराया गया तो दूसरी ओर अचानक 33 केवी लाइन पर तार टूटने से फॉल्ट हो गया। इस कारण बागला जिला अस्पताल सहित शहर के कई इलाकों में करीब सात घंटे तक बिजली ठप रही।
33/11 केवी उपकेंद्र कांशीराम तरफरा योजना के तहत ट्रांसफाॅर्मर व मशीनों के रखरखाव कार्य के कारण सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक लंबा शटडाउन लिया गया। इस दौरान शिव कॉलोनी, धन्नालाल बाग, अहियापुर खुर्द, लवकुश नगर, सिकंदरा तकिया, कच्चा पेच और चामड़ गेट जैसे घने आबादी वाले इलाकों में पूरे दिन बिजली ठप रही।
लोग पीने के पानी के लिए भी तरसते नजर आए। दूसरी तरफ शनिवार की सुबह करीब आठ बजे प्रगतिपुरम उपकेंद्र से ग्रामीण क्षेत्र को आपूर्ति देने वाली लाइन का तार अचानक टूटकर गिर गया। इस कारण प्रगतिपुरम, मेंडू रोड, और बागला अस्पताल क्षेत्र की बत्ती गुल हो गई। बिजली कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोपहर 12 बजे आपूर्ति बहाल की।
अधिशासी अभियंता शहर संदीप कुमार ने बताया कि कांशीराम फीडर पर मरम्मत के लिए शट डाउन लिया गया है, जबकि प्रगतिपुरम में ग्रामीण लाइन का तार टूटकर 33 केवी की लाइन पर गिरने से दिक्कत हुई है। इसे जल्द ही टीम ने सही कर दिया।
जिला अस्पताल का जनरेटर भी पड़ा ठप
बिजली ठप होने से सबसे ज्यादा दिक्कत जिला बागला अस्पताल में भर्ती मरीजों की हुई। एक तो चार घंटे तक मुख्य सप्लाई बंद रही तो दूसरी ओर अस्पताल के बैकअप जनरेटर में भी अचानक तकनीकी खराबी आ गई। जनरेटर न चलने से वार्डों में लगे पंखे और कूलर बंद हो गए, जिससे गर्मी में मरीज और उनके तीमारदारों का हाल बेहाल हो गया। तीमारदारों को हाथ के पंखे हिलाकर मरीजों की हवा करनी पड़ी।
सुबह आठ बजे अचानक बिजली चली गई। अस्पताल में भर्ती मेरी बहन को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। जब जनरेटर चलाने के लिए कहा गया तो पता चला कि वह भी खराब पड़ा है। चार घंटे तक बिना पंखे के बहुत बुरा हाल रहा, तीमारदार खुद गत्ते और हाथ के पंखों से हवा करते रहे।
-अफसाना, तीमारदार निवासी परसारा।
अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर कम से कम बैकअप की तो सही व्यवस्था होनी चाहिए। उमस इतनी ज्यादा थी कि मरीज पसीने से तर-बतर हो गए। बिजली निगम की लापरवाही से आए दिन फॉल्ट हो रहे हैं और खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
-संगीता, मरीज निवासी गांव कोरना।