आलू की फसल इस बार किसान के लिए घाटे का सौदा बन सकती है। किसान को भी इस फसल से बड़ा घाटा होता नजर आ रहा है। एक तरफ तो आलू का रेट पिछले साल के मुकाबले बेहद कम है। रेट इतना कम है कि लागत निकालने के भी किसान को लाले पड़ जाएंगे।
वहीं दूसरी तरफ जिले में आलू की औसत पैदावार पिछले साल के मुकाबले काफी कम होने का अनुमान है, जिससे किसानों को दोनों तरह से बड़ा घाटा होता दिख रहा है। जानकारों की मानें तो इस बार आलू की खुदाई शुरू होते ही मंडी में आलू के रेट की शुरुआत पिछले वर्ष के मुकाबले 200 रुपये बोरा कम यानी 400 रुपये क्विंटल कम हुई है। पिछले सीजन में जिस आलू के भाव 350 रुपये बोरा थे।
उस बोरे की कीमत इस समय 150 रुपये हो गई हैं। दूसरी तरफ जहां आलू की औसत पैदावार पिछले सीजन में 45 से 50 बोरा प्रति बोरा हुई थी, वहीं इस सीजन में यह 30 से 35 बोरा प्रति बीघा ही रह गई है, जिससे किसानों को दोहरा नुकसान उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
हालात यह हैं कि आलू की इस मंदी के कारण शीतगृह स्वामी भी किसानों को बारदाने और खुदाई का पैसा देकर मदद करने के लिए आगे नहीं आ रहे है। शीतगृह स्वामियों को भय है कि किसानों कोआलू का अच्छा दाम नहीं मिला तो उनका यह पैसा भी डूब सकता है।
आलू के भाव मंडी में पिछले वर्ष के मुकाबले आधे भी नहीं है। मंडी में आलू बिक नहीं पा रहा है, जिससे किसान काफी कम आलू लेकर मंडी आ रहा है।
- मोहम्मद इकबाल, आढ़ती
आलू की फसल को तैयार करने में लागत तो पूरी लगी है। अब जो भी भाव हों, किसान को तो अपना आलू हर हाल में बेचना ही पडे़गा।
- राधेलाल, आलू किसान
आलू किसान रेट को लेकर पिछले वर्ष के मुकाबले काफी घाटे में है। मंडी में 125 रुपये से 150 रुपये तक के आलू बोरा के भाव हैं, जो काफी कम हैं।
- मोहनलाल, आढ़ती
आलू की लागत तो बढ़ी है, लेकिन देश भर की मंडियों में आलू के कम रेट काफी चिंताजनक है। इससे किसानों को घाटा उठाना पड़ेगा।
- राजन सिंह, आलू किसान