खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण प्लास्टिक के कच्चे माल यानी दानों की कीमतों में आई तेजी से पिछले कुछ समय से बाजार में प्लास्टिक उत्पाद महंगे हो गए थे। अब भारत सरकार द्वारा प्लास्टिक के कच्चे माल पर आयात शुल्क में छूट दिए जाने के बाद कारोबारियों और उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
स्थानीय बाजारों में प्लास्टिक उत्पादों का उपयोग व्यापक रूप से होता है। नमकीन, हींग, गुलाल, मुरब्बा, अचार की पैकिंग से लेकर हैंडीक्राफ्ट और चप्पल तक, लगभग हर क्षेत्र में प्लास्टिक सामग्री का प्रयोग किया जाता है। ऐसे में कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर इन उत्पादों पर पड़ता है।
सरकार द्वारा आयात शुल्क माफ किए जाने के बाद प्लास्टिक दानों की लागत में कमी आने की संभावना है। इससे उत्पादों की कीमतों में भी गिरावट आ सकती है। कारोबारियों का कहना है कि आयात शुल्क में छूट का असर बाजार में दिखने में थोड़ा समय लगेगा, क्योंकि फिलहाल महंगे स्टॉक का इस्तेमाल हो रहा है। नया सस्ता माल आने पर ही कीमतों में वास्तविक गिरावट दिखाई देगी। सरकार के इस फैसले से प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में कमी आने की उम्मीद जरूर जगी है, जिससे कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं दोनों को राहत मिल सकती है।
पहले क्यों बढ़ी थी कीमतें
-खाड़ी देशों में युद्ध से आपूर्ति चल रही है प्रभावित
-प्लास्टिक दानों के दाम में तेजी से पैकिंग मेटेरियल है महंगा
-आयात लागत में बढ़ोतरी से स्थानीय कारोबारी के सामने है दिक्कत
-उत्पादन लागत में इजाफा होने से तैयार माल के भी दाम बढ़ाने की थी तैयारी
पिछले कुछ महीनों में प्लास्टिक के दाम काफी बढ़ गए थे, जिससे लागत बढ़ गई थी। अब सरकार की ओर से आयात शुल्क में राहत मिलने से उम्मीद है कि आने वाले समय में रेट कम होंगे और कारोबार को गति मिलेगी।
-तरुण पंकज, व्यापारी नेता।
हमारे काम में प्लास्टिक का काफी इस्तेमाल होता है। महंगाई के कारण बिक्री पर असर पड़ा था। अगर कच्चा माल सस्ता होता है तो हम भी अपने उत्पादों के दाम कम कर पाएंगे, जिससे ग्राहकों को फायदा होगा।
-अभय गर्ग, फुटवियर के कारोबारी।