साप्ताहिक बाजार में कपड़ों की बिक्री करतीं स्वय सहायता समूह की महिलाएं। स्रोत : स्वयं
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गांव रामपुर की पिंकी ने अपनी लगन और हौसले से तकदीर बदली है। उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़कर यह उपलब्धि हासिल की। पिंकी ने अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ 10 अन्य महिलाओं को भी रोजगार देकर स्वावलंबी बनाया है।
करीब दो वर्ष पहले पिंकी ने स्वयं सहायता समूह से 10 हजार रुपये का ऋण लिया था। उन्होंने रेडीमेड गारमेंट्स का छोटा सा कारोबार शुरू किया। शुरुआत में पिंकी दिल्ली और आगरा की थोक मंडियों से कच्चा व तैयार कपड़ा लाती थीं।
इसे स्थानीय स्तर पर बेचना शुरू किया। काम में मुनाफा दिखने लगा तो उन्होंने समूह की 10 महिलाओं को जोड़ा। ये महिलाएं अब कपड़ों की छंटाई, फिनिशिंग, टैगिंग और आकर्षक पैकिंग करती हैं। तैयार माल जनपद के विभिन्न कस्बों व ग्रामीण क्षेत्रों के साप्ताहिक हाट-बाजारों में आपूर्ति किया जाता है। समूह की कई महिलाएं स्वयं इन बाजारों में स्टॉल लगाकर कपड़ों की खुदरा बिक्री करती हैं।
आत्मनिर्भरता की राह
रेडीमेड गारमेंट्स कारोबार से जुड़कर महिलाएं हर महीने अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। वे अपने परिवारों की आर्थिक मदद कर रही हैं। इस पहल से उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। पिंकी की यह पहल गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी है। इससे प्रेरित होकर अन्य महिलाएं भी समूहों से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।