श्यामसुंदर शर्मा का बेटा अमित शर्मा बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक हैं। वह शिक्षण कार्य के साथ अपने पिता के साथ जैविक खेती में सहयोग कर रहे हैं। अमित ने बताया कि एक रिश्तेदार अफ्रीका में रहते थे। उनकी प्रेरणा का ही फल है कि हमने पॉली हाउस में जैविक खेती की शुरुआत की है। लाल, पीली और हरे तीन रंगों की शिमला मिर्च इस पॉली हाउस में तैयार हो रही हैं। वह स्कूल जाने से पहले और स्कूल से लौटने के बाद अपना पूरा समय शिमला मिर्च की खेती की देखभाल में लगाते हैं।
शुरुआत में महाराष्ट्र से मंगाया था बीज, हरियाणा में तैयार कराई थी पौध
अमित शर्मा ने बताया कि उन्होंने पांच साल पहले जब शिमला मिर्च की खेती करने की शुरुआत की थी तो महाराष्ट्र के पूना शहर से रंगीन शिमला मिर्च का बीज मंगवाया था। इसकी पौध हरियाणा के घरौंदा में तैयार कराई गई। यह पौध तैयार करने का प्लांट इंडो इजराइल का है, जिसमें विदेशी तकनीक का प्रयोग पौध तैयार करने में किया जाता है। लेकिन इस बार बीज भी हरियाणा के करनाल से लिया और पौध भी वहीं पर तैयार कराई।
50 फीसदी अनुदान पर तैयार कराया था पॉली हाउस
अमित शर्मा बताते हैं कि उन्हें उद्यान विभाग से 10 बीघा खेत में पॉली हाउस लगाए जाने की मंजूरी मिली, जिस पर करीब 38 लाख रुपये खर्च हुए। कुल लागत का 50 फीसदी अनुदान उद्यान विभाग से उनके पिता श्यामसुंदर शर्मा को प्राप्त हुआ।