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Exclusive: हाथरस की लाल-पीली शिमला मिर्च खा रहे दिल्ली-आगरा के लोग, बिकती है एक किलो 200 रुपए तक

Sun, 12 Mar 2023 03:08 AM IST
चमन शर्मा घनश्याम सिंह

सार

हाथरस की रंग-बिरंगी लाल, पीली और हरी मिर्च आगरा और दिल्ली के लोग खा रहे हैं। आमतौर पर शिमला मिर्च का भाव 30 से 40 रुपए प्रति किलोग्राम का है। जबकि रंग-बिरंगी शिमला मिर्च का बाजार में 150 से 200 रुपए प्रति किलोग्राम मिल रहा है।
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हाथरस के लाल-पीले शिमला मिर्च - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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समय के साथ अब किसान खेती की नई तकनीकी अपना रहे हैं। तभी तो हाथरस में चंदपा क्षेत्र के गांव नगला मोतीराय निवासी रिटायर्ड शिक्षक व उनके शिक्षक बेटे ने पॉली हाउस में शिमला मिर्च की जैविक खेती की पांच साल पहले शुरुआत की थी, वह इसे लगातार करते आ रहे हैं। वहीं कीट और रोग नियंत्रण के लिए भी जैविक तकनीकी का प्रयोग किया जा रहा है।

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लोग परंपरागत खेती के चक्कर में नुकसान झेल रहे हैं, लेकिन चंदपा क्षेत्र के गांव मोतीराय निवासी श्यामसुंदर शर्मा ने आलू की खेती को छोड़ दिया है। अब वह पूरे तरीके से जैविक खेती में जुट गए हैं। तभी तो उन्होंने गेहूं और आलू की परंपरागत खेती को छोड़कर शिमला मिर्च की जैविक खेती की शुरुआत की है, जिससे अब वह अच्छे मुनाफे की उम्मीद लगाए हुए हैं, जिसे पूरा करने के लिए शर्मा दिन-रात पॉलीहाउस में मेहनत कर रहे हैं। हाथरस के मुरसान क्षेत्र की रंग-बिरंगी लाल, पीली और हरी मिर्च आगरा और दिल्ली के लोग खा रहे हैं।

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फाइव स्टार होटलों में हैं लाल-पीली मिर्च की मांग
पूछे गए एक सवाल के जबाव में किसान ने बताया कि लोकल स्तर पर तो लाल और पीली शिमला मिर्च को खरीदने वाले नहीं हैं। इसकी सप्लाई आगरा-दिल्ली के फाइव स्टार होटल और रेस्टोरेंटों में होती है। वहां पर ही इसकी उचित कीमत मिल पाती है।

आम शिमला मिर्च की अपेक्षा मिल रहे पांच गुने दाम
आमतौर पर शिमला मिर्च का भाव 30 से 40 रुपए प्रति किलोग्राम का है। जबकि रंग-बिरंगी शिमला मिर्च का बाजार में 150 से 200 रुपए प्रति किलोग्राम मिल रहा है। इससे सालभर में करीब 12 से 14 लाख रुपए की आमदनी होगी है। अमित शर्मा ने बताया कि जो आमदनी सामान्य तौर पर 50 बीघा खेत में परंपरागत खेती करके होती है, उतनी आमदनी पॉलीहाउस से 10 बीघा शिमला मिर्च से प्राप्त हो जाती है।

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एक रिश्तेदार से मिली प्रेरणा

श्यामसुंदर शर्मा का बेटा अमित शर्मा बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक हैं। वह शिक्षण कार्य के साथ अपने पिता के साथ जैविक खेती में सहयोग कर रहे हैं। अमित ने बताया कि एक रिश्तेदार अफ्रीका में रहते थे। उनकी प्रेरणा का ही फल है कि हमने पॉली हाउस में जैविक खेती की शुरुआत की है। लाल, पीली और हरे तीन रंगों की शिमला मिर्च इस पॉली हाउस में तैयार हो रही हैं। वह स्कूल जाने से पहले और स्कूल से लौटने के बाद अपना पूरा समय शिमला मिर्च की खेती की देखभाल में लगाते हैं।



शुरुआत में महाराष्ट्र से मंगाया था बीज, हरियाणा में तैयार कराई थी पौध
अमित शर्मा ने बताया कि उन्होंने पांच साल पहले जब शिमला मिर्च की खेती करने की शुरुआत की थी तो महाराष्ट्र के पूना शहर से रंगीन शिमला मिर्च का बीज मंगवाया था। इसकी पौध हरियाणा के घरौंदा में तैयार कराई गई। यह पौध तैयार करने का प्लांट इंडो इजराइल का है, जिसमें विदेशी तकनीक का प्रयोग पौध तैयार करने में किया जाता है। लेकिन इस बार बीज भी हरियाणा के करनाल से लिया और पौध भी वहीं पर तैयार कराई।



50 फीसदी अनुदान पर तैयार कराया था पॉली हाउस
अमित शर्मा बताते हैं कि उन्हें उद्यान विभाग से 10 बीघा खेत में पॉली हाउस लगाए जाने की मंजूरी मिली, जिस पर करीब 38 लाख रुपये खर्च हुए। कुल लागत का 50 फीसदी अनुदान उद्यान विभाग से उनके पिता श्यामसुंदर शर्मा को प्राप्त हुआ।
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