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पुलिस पर हमले से दहशत में लोग

Tue, 13 Dec 2016 11:38 PM IST
अमर उजाला, हाथरस
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बदमाशों के हमले में घायल सिकंदराराऊ कोतवाली के सिपाही। - फोटो : अमर उजाला
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सोमवार रात को पुलिस पर हुए हमले ने पुलिस विभ्‍ााग को हिलाकर रख्‍ा दिया है। इसके अलावा बदमाशों की खौफनाक हरकत से लोगों में दहशत का माहौल है। हालांकि नगर के मोहल्ला बारहसैनी में भी 22 साल पहले बदमाशों ने इसी दुस्साहसिक तरीके से डकैती की वारदात को अंजाम दिया था।
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बदमाशों की फायरिंग में यहां एक होमगार्ड की मौत हो गई थी और एक सिपाही गंभीर रूप से घायल हुआ था। बदमाश पुलिस कर्मी की सरकारी रायफल और एक व्यक्ति की बंदूक भी लूटकर ले गए थे। 
डकैती की यह वारदात सरदार परमजीत सिंह के घर पर हुई थी।

बदमाशों का सामना मौके पर आए एक सिपाही और एक होमगार्ड से भी हो गया था। इन दोनों ने बदमाशों का मुकाबला भी किया था, लेकिन बदमाशों की संख्या ज्यादा होने के कारण उन्होंने दोनों को घेरकर गोली मार दी थी। होमगार्ड की मौके पर ही मौत हो गई थी और सिपाही को गंभीर हालत में अस्पताल में दाखिल कराया गया था।
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उसके बाद बदमाशों ने पोरा-सिंधौली रोड पर रोड-होल्ड-अप की वारदात के बाद पुलिस कर्मी को गोली मार दी थी। इतने वर्ष बाद मुठभेड़ की यह यह तीसरी वारदात हुई है, जिसमें पुलिस कर्मी को गोली मारकर गंभीर रूप से घायल किया गया है, जिससे पूरा पुलिस महकमा सकते की हालत में है।

 हाथरस रोड की शुरुआत से लेकर अलीगढ़ एनएच 91 तक सेना की सैकड़ों बीघा जमीन में उग रहीं बबूल की झाड़ियां अरसे से बदमाशों की शरणस्थली बनी हुई हैं। दिन में यहां शराबी-जुआरियों का जमघट रहता है तो रात्रि में यह जगह बदमाशों  के छिपने के काम आती है। इनकी आड़ में ही बदमाश लूटपाट की घटनाओं को बेखौफ होकर अंजाम देते हैं और इनके झुरमुटों में ही खो जाते हैं। पांच साल पहले भी बदमाशों ने इसी स्थान पर एक युवक को लूटकर उसकी हत्या कर दी थी। क्षेत्र के गांव देवर पनाखर का युवक बाहर नौकरी करता था।

वह छुट्टियों में घर आया था और अल सुबह पैदल अपने गांव जा रहा था। रास्ते में बबूल की झाड़ियों से निकले बदमाशों ने लूटपाट के बाद उसकी हत्या कर दी थी। यह जगह राहगीरों और वाहन सवारों के साथ लूटपाट के लिए कुख्यात हो चुकी है। अंधेरा होने के बाद जीटी रोड से सीएचसी जाने वाली सड़क पर लोग जाने से डरते हैं। यहां से केवल अस्पताल जाने वाले ही मजबूरी में निकलते हैं। इस जगह पर बस स्टैंड और मुंसिफ न्यायालय के निर्माण का प्रस्ताव भी शासन को गया है, लेकिन जमीन सेना की होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

मवेशियों की चोरी और लूट की घटनाओं में इजाफे की बड़ी वजह इनकी ऊंची कीमतें है। एक भैंस की बाजार में कीमत करीब 50 हजार रुपये है। चोरी करने के बाद तत्काल मवेशियों को ले जाकर अलीगढ़ के कट्टीघरों में बेच दिया जाता है। यही वजह है कि सर्दी के मौसम में क्षेत्र में यकायक भैंस चोरी की घटनाएं बढ़ जाती हैं। चोर साथ में भैंस लादने के लिए मेटाडोर लेकर आते हैं और विरोध करने पर ग्रामीणों को फायरिंग कर भयभीत कर देते हैं।
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