संवाद न्यूज एजेंसी, सिकंदराराऊ।
कोरोना काल में जिस तरह देश की अर्थव्यवस्था को पलीता लगा है, उससे हर वर्ग आहत हुआ है। युवक बेरोजगार हो गए हैं। उद्योग-व्यापार चौपट हो गया है। लोग समझ गए हैं कि कोरोना में सावधानी बरतना ही उसका इलाज है। अब जब देश में लॉकडाउन की पाबंदियां हट रही हैं तो लोगों को अपने रोजगार और रोजमर्रा की जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। हालांकि यह काम आसान तो नहीं हैं, लेकिन सभी को उम्मीद है कि हालात फिर सुधरेंगे।
मेरी नोएडा में नौकरी छूट गई। यह उस समय की बात है, जब दिल्ली-एनसीआर लॉकडाउन के हाहाकार के चलते खाली हो रहा था। अब सबकुछ पटरी पर आ रहा है तो दिल्ली, एनसीआर में सभी बंद फैक्टरियां चालू होनी चाहिए।
-तरुण त्रिवेदी, युवा
जैसे रोजगार कम हुए हैं, वैैसे ही उन्हें पटरी पर लाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ेंगे। सब को मिलकर देश के लिए सोचना पड़ेगा। जब तक रोजगार के अवसर सुलभ नहीं होंगे, तब तक तरक्की की उम्मीद करना भी बेमानी है।
-राकेश गुप्ता, युवा व्यापारी
अब ट्रांसपोर्ट कारोबार को पटरी पर लाया जा रहा है, लेकिन इसकी गति बहुत धीमी है। सरकार को इस व्यवसाय को पटरी पर लाने के लिये कुछ रियायतों की घोषणा उस समय तक करनी होगी, जब तक कि कारोबार पटरी पर नहीं लौट आए।
-विष्णु वार्ष्णेय, ऑटोमोबाइल्स कारोबारी
समाज के हर तबके को अपनी सामर्थ्य के अनुसार काम करना पड़ेगा। अक्सर हमारा व्यापार कई बार गिरकर उठता है। इसे उठाने की क्षमता हमारे अंदर हैं। आगे भी हम ऐसा करके दिखाएंगे। सबकुछ पहले जैसा हो जाएगा।
-कर्दम सिंह, सरकारी कर्मचारी
विष्णु वार्ष्णेय। - फोटो : SIKANDHRA RAHU
कर्मद सिंह। - फोटो : SIKANDHRA RAHU
तरूण त्रिवेदी।- फोटो : SIKANDHRA RAHU