संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट का आदेश आते ही जहां काफी राजनेताओं के चेहरे खिल गए तो वहीं कुछ राजनेता मायूस भी नजर आए। जिले में इस बार भी जिला पंचायत अध्यक्ष का पद अनारक्षित था। इसके लिए कुछ वरिष्ठ राजनेताओं ने कसरत भी शुरू कर दी थी। हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद अब यह माना जा रहा है कि जिला पंचायत अध्यक्ष का पद अनारक्षित नहीं रहेगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पंचायत चुनाव में वर्ष 2015 को आधार वर्ष मानकर आरक्षण का चक्रानुक्रम करने के आदेश दिए हैं। जिले में सभी सात ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों की आरक्षण सूची अनंतिम रूप से जारी कर दी गई थी। काफी राजनेता इस अनंतिम सूची को ही अंतिम सूची मानकर अपनी तैयारी में जुट गए थे।
जिला पंचायत अध्यक्ष का पद पहले से ही अनारक्षित घोषित कर दिया था। वर्ष 2015 में भी यह पद अनारक्षित था। ऐसे में इस पद के लिए जिले के कई राजनीतिक दिग्गज ताल ठोंकने में लगे थे। इस पद पर पहुंचने के लिए जिला पंचायत सदस्य बनने में जुट गए थे। यही स्थिति ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य के लिए थी। इधर, इस अनंतिम सूची के बाद इसमें आपत्तियां भी मांगी गई थी।
आपत्तियां मिलने पर इनका निस्तारण किया जा रहा था कि इसी दौरान इस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। अंतिम सूची जारी नहीं हो सकी थी। इसके बाद राजनेता यह टकटकी लगाए हुए थे कि आखिर उच्च न्यायालय का अगला आदेश क्या होगा। जैसे ही सोमवार को कोर्ट का आदेश आया तो कुछ राजनेताओं में खलबली मच गई।
कोर्ट के आदेश के बाद काफी राजनेता खुश हैं। अब उन्हें इस चुनाव में किस्मत आजमाने का मौका मिलेगा। जिला पंचायत अध्यक्ष पद शासन ने अनारक्षित घोषित कर रखा था। ऐसे में यह माना जा रहा है कि यह इस बार आरक्षित होगा। कुछ सीटों का आरक्षण बदला जाएगा। ऐसे में अब सबकी नजर नए सिरे से होने वाले आरक्षण पर है।