तेज धूप और लू के कारण लोग तेजी से डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का शिकार हो रहे हैं। हालत यह है कि जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। बुधवार को जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में अचानक इजाफा हुआ, जहां 16 नए मरीजों को गंभीर स्थिति में भर्ती करना पड़ा।
नए गंभीर मरीजों के लिए पुराने मरीजों को डिस्चार्ज करना पड़ रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ ही अस्पतालों में उल्टी, दस्त, तेज बुखार और चक्कर आने वाले मरीजों की कतारें लग रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को प्राथमिक उपचार के लिए भी मीलों दूर जिला अस्पताल या निजी क्लीनिकों की दौड़ लगानी पड़ रही है। बुधवार को जिला अस्पताल में 1812 नए पर्चे बनाए गए। ओपीडी में 2400 से अधिक मरीज पहुंचे।
फिजिशियन डाॅ. अवधेश कुमार ने बताया कि दूषित खान-पान और बढ़ते तापमान के कारण पेट के संक्रमण के मामले दोगुने हो गए हैं। भीषण गर्मी और उमस के बीच डायरिया (दस्त) के मरीज आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उल्टी-दस्त में लापरवाही सीधे तौर पर डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) के खतरे को बुलावा दे रहा है।
इन बातों का रखें ध्यान :
बासी खाने से बचें : रात का रखा भोजन या खुला हुआ सामान न खाएं।
कैफीन से परहेज : चाय, कॉफी या अधिक चीनी वाले कोल्ड ड्रिंक्स न पिएं, ये शरीर को और सुखाते हैं।
स्वच्छता : खाना खाने से पहले और शौच के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं।
पानी उबालकर पीएं : यदि पानी की शुद्धता पर शक हो, तो उसे उबालकर ठंडा करके पीएं।
ओआरएस का घोल : दस्त शुरू होते ही हर बार ओआरएस का घोल पीएं।
डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ी है। गर्मियों को ध्यान में रखते हुए जिला अस्पताल ने पूरी तैयारी कर रखी है। पर्याप्त मात्रा में जीवन रक्षक दवाएं हैं। स्टाफ को भी अलर्ट पर रखा गया है।
डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस