असंतुलित खानपान और नशे का सेवन लोगों के लिवर को खराब कर रहा है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग लिवर से संबंधित बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। लिवर संबंधी बीमारियों के करीब 10 मरीज रोजाना उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
जीवनशैली में बदलाव और शराब के सेवन से लिवर में फैट यानी चर्बी जमा हो जाती है। शुरू में इस बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। समय के साथ बीमारी के लक्षण सामने आने लगते हैं। फैटी लिवर में पेट दर्द, भूख न लगना, वजन कम होना, थकान होना आदि लक्षण सामने आते हैं। फैटी लिवर के बाद की स्थित हेपेटाइटिस है। इस बीमारी में भी लिवर में सूजन हो जाती है। बीमारी अनियंत्रित होने पर यह केंसर तक का करण बन सकती है। हेपेटाइटिस के बाद की स्थिति सिरोसिस होती है। सिरोसिस एक क्रोनिक बीमारी है। यह बीमारी लंबे समय तक लिवर के खराब रहने से होती है। इस बीमारी में लिवर के स्वस्थ ऊतक नष्ट होने लगते हैं। जिससे लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता है। उल्टी होना, भूख में कमी, थकावट, दस्त, पीलिया, लगातार वजन में कमी आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं।
बचाव के उपाय : चिकित्सक के मुताबिक शराब का सेवन न करें। बाहर का खाना खाने से बचें। स्वच्छ पेय जल का इस्तेमाल करें। साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। खाने की वस्तुओं को अच्छी तरह से साफ करने के बाद ही इस्तेमाल करें। इंजेक्शन लगवाते समय हमेशा नई सुई का इस्तेमाल करें।
शराब का सेवन और वायरल से लिवर संबंधी बीमारीयां बढ़ रही हैं। लिवर की बीमारियों के करीब दस मरीज रोजाना उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचते हैं। इन मरीजों को दवा के साथ शराब व नशा छोड़ने की सलाह दी जा रही है। लिवर की बीमारी के लक्षण सामने आने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। - डॉ. वरुण चौधरी, फिजीशियन बागला जिला अस्पताल, हाथरस