रंगमंच की दुनिया में हाथरस का नाम हाथरसी स्वांग विधा के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंचाने वाले पं. नथाराम गौड़ की 14 जनवरी को 150वीं जयंती मनाई जाएगी, लेकिन स्वांग नौटंकी जैसी लोकधर्मी रंगमंचीय विधा अब अपनों के मध्य ही बेगानी हो गयी हैं। हर साल पं. नथाराम गौड़ की जयंती पर हाथरसी स्वांग जीवंत होता है।
पण्डित नथाराम गौड़ ने दो अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य किए। पहला तो यह कि परंपरागतअखाड़ों की सीमाओं तक सीमित भगत-सांगीत विधा को आम जनमानस के मध्य लाए और इसे विश्व स्तर पर स्थापित किया। दूसरा यह कि अपना लगभग 200 आलेखों से अधिक का साहित्य अपने श्याम-प्रेस में प्रकाशित कर संरक्षित कर दिया। -डॉ. खेमचंद्र यदुवंशी, अकादमी पुरस्कार-2014 से सम्मानित वरिष्ठ लोक नाट्यविद
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हमें गर्व है कि हम पं. नथाराम गौड़ के वंशज हैं, जिन्होंने हाथरस की इस भूमि का नाम देश और विदेश में रोशन किया। हम उनके साहित्य को निजी प्रयासों से संरक्षित करते हुए इसके प्रचार-प्रसार के लिए सरकारी स्तर पर कई बार प्रयास कर चुके हैं, किंतु आज तक सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। भारत सरकार को चाहिए कि उन्हें भारत-रत्न से अलंकृत करे। -राहुल गौड़, प्रपौत्र पं. नथाराम गौड़
श्याम प्रेस में होगा स्वांग का मंचन
पं. नथाराम गौड़ की 150वीं जयंती के अवसर पर मुख्य आयोजन उनकी कर्म स्थली श्याम प्रेस में सुबह 10 बजे से आयोजित किया जाएगा। प्रथम चरण में उन्हें भावांजलि अर्पण के उपरांत इस लोककला के उन्नयन के प्रति समर्पित प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा। द्वितीय चरण में सांगीत : दास्तान-ए-लैला मजनूं का मंचन डॉ. खेमचंद यदुवंशी व साथी कलाकारों द्वारा किया जाएगा।