तीन माह से वेतन न मिलने के विरोध में हाथरस डिपो की कार्यशाला में आउटसोर्सिंग मैकेनिकों की हड़ताल सोमवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रही। हाथरस का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे अतरौली के एआरएम संजीव वशिष्ठ कार्यशाला पहुंचे और कर्मचारियों से वार्ता की। कर्मियों का आरोप है कि एआरएम ने उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी।
हालांकि कर्मियों ने बिना वेतन मिले काम करने से इन्कार कर दिया। इसे लेकर उनकी एआरएम से करीब 20 मिनट तक तीखी बहस हुई। इसके बाद कर्मचारियों ने पूरी बातचीत का वीडियो भी बना लिया।
कर्मचारियों का कहना है कि तीन माह से वेतन नहीं मिला है, ऐसे में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। पहले वेतन दिया जाए, उसके बाद ही वह कार्यशाला में लौटेंगे। हड़ताल के चलते चौथे दिन भी कार्यशाला का नियमित रखरखाव प्रभावित रहा। कई बसों की मरम्मत का कार्य सीमित संसाधनों के सहारे कराया गया।
कर्मचारियों का आरोप है कि कार्यशाला का संचालन दूसरे डिपो से बुलाए गए कर्मियों के भरोसे किया जा रहा है, जिससे बसों के रखरखाव की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। चार दिन पहले डीएम की ओर से समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन तय समय बीत जाने के बाद भी न तो तीन माह का बकाया वेतन मिला और न ही कोई ठोस समाधान निकला। इससे कर्मचारियों में नाराजगी और बढ़ गई है।
पहले भी मिला था आंशिक भुगतान
हड़ताल के दौरान कुछ कर्मचारियों के खातों में केवल एक माह का वेतन भेजा गया था, जबकि अधिकांश कर्मियों को अब भी तीन माह का भुगतान नहीं मिला है। कर्मचारियों का आरोप है कि यह उनके बीच फूट डालने की कोशिश है। उनका कहना है कि जब तक सभी कर्मियों का पूरा बकाया वेतन नहीं मिलेगा, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। वेतन मांगा तो काम पर लौटने का दबाव बनाया गया और नौकरी से निकालने की बात कही गई। पूरा बकाया मिलने तक हड़ताल जारी रहेगी।
-प्रवीन कुमार, आउटसोर्सिंग मैकेनिक।
एआरएम अतरौली ने कर्मचारियों से सिर्फ बातचीत कर उन्हें काम पर लौटने के लिए समझाया है। वेतन भुगतान का मामला संबंधित कंपनी के स्तर का है। कर्मचारियों की समस्या उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दी गई है और समाधान का प्रयास किया जा रहा है।
-मंगेश कुमार, प्रभारी, हाथरस डिपो।