अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुन्नालाल के न्यायालय ने एक मुकदमे की विवेचक महिला दरोगा के खिलाफ मनमाने ढंग से विवेचना किए जाने के मामले में विभागीय कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने आदेश में यह भी कहा है कि दरोगा के विरुद्ध की गई कार्रवाई से न्यायालय को भी अवगत कराया जाए।
न्यायालय ने इस मुकदमे की अग्रिम विवेचना किसी राजपत्रित अधिकारी से कराए जाने के आदेश दिए हैं। आदेश के अनुपालन के लिए पुलिस अधीक्षक को इसकी प्रति भेजे जाने के आदेश दिए हैं। थाना सासनी में एक विवाहिता ने दुष्कर्म, जानलेवा हमला, मारपीट, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी देने और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं में अपने ससुरालीजनों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था।
आरोप है कि इस मुकदमे की विवेचक प्राची शर्मा ने दोषपूर्ण विवेचना की। पीड़िता के बार-बार कहने पर भी सही तथ्यों को विवेचना में शामिल नहीं किया। विवेचक ने विपक्षियों से मिलकर जानलेवा हमला व दुष्कर्म की धारा का लोप कर दिया और आरोपी की नामजदगी को गलत साबित कर दिया। इस मामले में देवर पर दुष्कर्म का आरोप था। विवेचक ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
पीड़िता के अधिवक्ता ने आपत्ति दाखिल की। न्यायालय ने प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए कहा है कि चिकित्सकीय प्रपत्र में घटना का समर्थन होने के बावजूद विवेचक ने धारा 307 और 376 का लोप कर दिया है। इससे प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि विवेचक ने मनमाने तौर पर आरोपपत्र न्यायालय में प्रेषित कर दिया है। प्रथमदृष्टया विवेचना दोषपूर्ण प्रतीत होती है।