आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के अंतर्गत अभी तक आभा आईडी व ऑनलाइन पर्चे बनने का काम ही हो सका है। अब जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश मिले हैं कि प्रत्येक ऑनलाइन पर्चे को आभा आईडी से जोड़ना है, जिससे मरीजों का ट्रैक रिकॉर्ड रखा जा सके। एक अप्रैल से इसे लागू किया जाना है। शुक्रवार को आगरा में हुई एबीडीएम की कार्यशाला में जिले के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया था।
मिशन की शुरुआत पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर कोराना काल में हुई थी, जिसे सितंबर 2021 में समूचे देश में लागू कर दिया था। संसाधनों के अभाव के चलते चार साल बीतने के बाद भी जिला केवल आभा आईडी और उसके बाद ऑनलाइन पर्चे बनाने तक ही काम कर सका है। जिले में अब तक 11,67,015 लोगों की आभा आईडी जनरेट की जा चुकी हैं। टीकाकरण वाले बच्चों से लेकर सरकारी अस्पताल में आ रहीं प्रसूताओ की आभा आईडी जनरेट की जा रही हैं।
आगरा में हुई कार्यशाला में सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण व एबीडीएम की मिशन निदेशक रितु माहेश्वरी ने निर्देश दिए हैं कि एक अप्रैल से जिला अस्पताल व सीएचसी पर आने वाले मरीजों के ऑनलाइन पर्चे आभा आईडी के आधार पर ही बनाए जाएं, जिससे आईडी पर इनका हेल्थ रिकॉर्ड अपडेट रहे। परामर्श, दी गईं दवाओं व जांच रिपोर्ट को मरीज की आईडी पर अपडेट किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री, पर्सनल हेल्थ रजिस्ट्री और हेल्थ इन्फॉर्मेशन सिस्टम के जरिये ईको सिस्टम तैयार कर रहा है, जहां मरीजों का डाटा पूरी तरह गोपनीय व सुरक्षित रहेगा।
एबीडीएम के तहत मिलेंगे कंप्यूटर ऑपरेटर
एबीडीएम को लागू करने में सबसे बड़ी परेशानी संसाधनों की है। जिला अस्पताल से लेकर जिले के सातों सीएचसी तक पर कंप्यूटर ऑपरेटर नहीं हैं, जो ऑनलाइन पर्चे व आभा आईडी का कार्य दे सके। फिलहाल ऑनलाइन पर्चों के लिए वार्ड बॉय, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व प्रशिक्षुओं की मदद ली जा रही है।
मरीजों की भीड़ का दबाव और तय जिम्मेदारी न होने के कारण ऑनलाइन पर्चे में उनके मोबाइल नंबर या आभा आईडी अंकित नहीं किए जाते हैं। इस कारण इन पर्चों को आभा आईडी से जोड़ना संभव नहीं होता। ऑनलाइन पर्चा जनरेट करने के लिए मोबाइल नंबर डालना आवश्यक होता है, इसलिए कोई भी इस डिजिट डाल दी जाती हैं। इस समस्या को देखते हुए एबीडीएम के तहत शासन से जिला अस्पताल को पांच तथा प्रत्यक सीएचसी को तीन-तीन कंप्यूटर ऑपरेटर्स दिए जाएंगे।
एबीडीएम को रफ्तार देने के लिए आगरा में कार्यशाला हुई थी। लगभग 73 फीसदी आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं। ऑनलाइन पर्चे भी बन रहे हैं। अब शत-प्रतिशत पर्चे आभा आईडी से जोड़े जाएंगे। डिजिट रिकॉर्ड रहने से मरीजों को राहत मिलेगी। समय से और सटीक उपचार मिल सकेगा।
-डाॅ. राजीव गुप्ता, एसीएमओ
आभा आईडी की प्रगति पर एक नजरकुल लक्षित आबादी - 1588414
आभा आईडी बनीं - 11,67015
आभा आईडी में जुटे स्वास्थ्य कर्मी
आशा - 1395
एएनएम - 179
सीएचओ- 151