अमृत योजना के तहत पेयजल आपूर्ति के लिए चल रहा काम।
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अमृत योजना के तहत शहरी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था करने के लिए जल निगम द्वारा कार्यदायी संस्था से काम कराया जा रहा है। यहां विभागीय स्तर पर इन कामों की देखरेख में लापरवाही बरती जा रही है। सूत्रों के अनुसार योजना में प्रयोग की जा रही एचडीपी/एसी पाइप की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं है। यह पाइप भविष्य में लोगों के लिए उपयोग में नहीं आ पाएगी। इतना ही नहीं पाइप लाइन डालने के लिए की गई खुदाई भी एस्टीमेट के अनुसार नहीं की गई। वही विभागीय अधिकारियों द्वारा इन सब कामों का भुगतान भी नामित संस्था को कर दिया गया है। हालांकि इस मामले में सांसद राजेश कुमार दिवाकर द्वारा विगत में शिकायत की जा चुकी है।
अमृत योजना के तहत फेस के जरिए शहरी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए काम किया जा रहा है। यह काम जल निगम द्वारा नामित संस्था मैसर्स एचएमएस इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड से कराया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार नामित संस्था द्वारा कार्य स्थल पर खोदी गई लाइन की चौड़ाई .69 मीटर नहीं है। यहां तक कि इसकी औसतन 30 सेमी से 40 सेमी तक है, जबकि एस्टीमेट के अनुसार इस काम के लिए भुगतान भी कर दिया गया है। यहां तक कि खड़ंजा उखाड़ने की चौड़ाई .70 मीटर दर्शाई गई है, जो कि मौके पर .30 मीटर से .40 मीटर है। वही इसका भुगतान भी संबंधित अधिकारियों और नामित संस्था द्वारा .70 मीटर के हिसाब से ले लिया गया है। यहां तक कि जूनियर इंजीनियर द्वारा दस्तावेजों में खड़ंजा उखाड़ने और लगाने का मापन कार्य 17 अगस्त दिखाया गया है, जबकि खड़ंजा उखड़ने के बाद पाइप लाइन के लिए मिट्टी की खुदाई का कार्य 12 जुलाई को दर्शाया गया है। इससे यह भी स्पष्ट हो गया कि यह कार्य फर्जी रुप से माप पुस्तिका में दर्ज किया गया है।