साइबर अपराधियों की नजर लोगों की गाढ़ी कमाई पर बनी हुई है। ठगी के लिए रोज नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। शादियों का सीजन समाप्त होने पर अब पीएम किसान सम्मान निधि की लिस्ट के नाम से एपीके फाइल भेजकर लोगों को ठगने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए परिचितों के नंबर क्लोन कर संदेश भेजे जा रहे हैं। जिले में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन समझदारी की वजह से लोग ठगी से बच गए हैं।
मोबाइल नंबर हो रहे क्लोन
साइबर सेल प्रभारी आशीष कुमार ने बताया कि पिछले शादी के सीजन में बिसावर के एक व्यक्ति को शादी के कार्ड के जरिये ठगने का प्रयास किया था। उनका मोबाइल हैक कर कई लोगों को शादी का कार्ड भेजा गया था। समय रहते उन्होंने सभी को सतर्क कर दिया था। शादी के बाद अब साइबर शातिर आरटीओ चालान, पीएम किसान सम्मान निधि आदि नामों से फाइल भेजकर लोगों के फोन क्लोन करने का प्रयास कर रहे हैं। एपीके फाइल से एकाउंट हैक नहीं हो पता तो शातिर सीधे मेसेज भेजकर रुपये मांगते हैं।
टू स्टेप वेरिफिकेशन जरूरी
साइबर सेल प्रभारी आशीष कुमार ने बताया कि जिस भी सोशल साइट एप का प्रयोग करें, उस पर टू स्टेप वेरिफिकेशन कोड जरूर लगाएं। फोन बुक पर भी इस सिक्योरिटी का इस्तेमाल करें, जिससे डाटा हैक कर कोई परिचित लोगों के नंबर पर मेसेज न भेज सके। क्लोन होने वाले नंबर का पूरा मोबाइल हैक हो जाता है और उसके ही नंबरों से फिर मिलने वालों को संदेश भेजा जाता है।
केस-1
नाई का नगला के रहने वाले ललित मोहन वार्ष्णेय के मोबाइल पर 15 दिसंबर को व्हाट्सएप पर परिचित ने मेसेज भेजा। इसमें पीएम किसान योजना लिस्ट नाम से एपीके फाइल थी। परिचित का नंबर होने के कारण उन्होंने इस लिस्ट को डाउनलोड कर खोलने का प्रयास किया, लेकिन चेतावनी संदेश आने से फाइल खुली नहीं। सफलता न मिलने पर ठग ने फिर उसी नंबर से परिचित बन गूगल-पे से रुपये मांगे। ललित ने हैक होने के डर से मोबाइल फॉर्मेट किया।
केस-2
मुरसान के रहने वाले अंकुश गौड़ के साथ भी यही हुआ। रविवार को उनके व्हाट्स एप नंबर पर चचेरे भाई के नंबर से संदेश आया। उसमें भी पहले पीएम किसान योजना लिस्ट के नाम से फाइल थी। इस नाम के आगे डॉट एपीके भी लिखा हुआ था। उन्हें लगा पीडीएफ फाइल है और खोलने का प्रयास, लेकिन उन्हें भी मोबाइल सिस्टम से चेतावनी संदेश मिला। इसके बाद ड्राइव में जाकर फाइल को डिलीट किया।
केस-03
सासनी के अधिवक्ता केके शर्मा के साथ भी यही हुआ था। उन्होंनेे एपीके फाइल डाउनलोड कर ली थी, जिसके बाद उनकी फेसबुक साइट का ही क्लोन बना लिया गया। बाद में साइबर एक्सपर्ट की मदद से उन्होंने फोन को क्लीन कराया था।
इनका कहना है
फोन नंबर क्लोनिंग की घटनाएं बढ़ रही हैं। हालांकि जिले में कोई ठगी का केस सामने नहीं आया है, फिर भी लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। शादी के कार्ड की तरह ही पीएम किसान सम्मान योजना, आरटीओ चालान आदि एपीके फाइल भेजी जा रही हैं। परिचित व्यक्ति के नंबर से भी यदि आखिर में एपीके फाइल लिखी आए तो उसे न खोलें। ठगी होने पर तत्काल साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं।
-चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी