जिले को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से जुटा हुआ है। ओडीएफ हुए गांवों के सत्यापन के लिए डीएम डॉ. रमाशंकर मौर्य के आदेश पर जिला स्तरीय अधिकारियों और उनके अधीनस्थों की टीमें बनाई गई थीं।
सत्यापन में कई गांवों में शौचालय निर्माण में तमाम खामियां निकलीं। इस सत्यापन के काम में जिले के कई अधिकारी अभी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। इस कारण कई गांवों का सत्यापन का काम अटका हुआ है। सोमवार को डीएम ने विकास भवन में सीडीओ कार्यालय में बैठकर स्वच्छ भारत मिशन के तहत चल रहे शौचालय निर्माण की समीक्षा की। उन्होंने सत्यापन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि ओडीएफ को लेकर किसी भी कीमत पर लापरवाही बरती नहीं जाएगी। पीओ डूडा, एजिला उद्योग केंद्र, जिला सेवायोजन अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, अधिशासी अभियंता पीएमजीएसवाई, बाल विकास परियोजना अधिकारी सिकंदराराऊ, एई जल निगम, ने अभी तक सत्यापन रिपोर्ट नहीं भेजी है।