पिछले वर्ष मिले थे 3.40 करोड़ रुपये
पिछले साल 31 मार्च तक नगर पालिका को लगभग आठ हजार भवनों से 3.4 करोड़ रुपये कर के रूप में प्राप्त हुए थे। इस बार मार्च में चार करोड़ से बकाया जमा होने की संभावना जताई जा रही है। पिछले वर्ष से सबक लेते हुए नगर पालिका ने इस बार बड़े बकायेदारों को पहले ही चिह्नित कर लिया है। ऐसे 120 बकाएदार छांटे गए हैं। इनमें 10 से एक लाख रुपये तक के बकाएदार हैं, जो वर्ष 2016 के जीआईएस सर्वे में आने के बाद से ही गृह व जलकर का भुगतान नहीं कर रहे हैं।
इन मोर्चों पर अटकी है वसूली
- पुराने बकायेदार : शहर की पुरानी व घनी आबादी वाले इलाकों में 11 हजार भवन ऐसे हैं, जो कई साल से बकायेदारों की सूची में हैं। ये जीआईएस सर्वे के बाद से टैक्स नहीं दे रहे। इनमें अधिकतर तीन हजार रुपये लेकर 20 हजार रुपये तक के बकाएदार हैं।
- मलिन बस्तियां : शहर की मलिन बस्तियों में लगभग नौ हजार भवन चिह्नित किए गए हैं। इनसे टैक्स की वसूली नहीं हो पाती। इनमें दो सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक के बकायेदार हैं।
- लापता मालिक : शहर में छह हजार प्लॉटों के भी बिल निकाले जाते हैं। इनमें 70 फीसदी पर मालिकों के नाम दर्ज नहीं हैं, जिससे वसूली नहीं हो पाती।
- विवादित इलाके : शहर में कई इलाके विवादित भी हैं, जैसे किला खाई, वाटर वर्क्स आदि। इन इलाकों में तीन से साढ़े तीन हजार ऐसे मकान हैं, जिनसे वसूली नहीं हो पाती।
आंकड़े एक नजर में
- कुल जारी बिल 34,123
- कुल बकाया राशि 6.89 करोड़
- अब तक हुई वसूली 2 करोड़ (6700 भवन)
- चिह्नित बड़े बकायेदार 150
- पुराने शहर में भवन 11 हजार
- मलिन बस्ती में भवन 9 हजार