बीएच ऑयल मिल रोड पर रखे मटके। संवाद
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सूरज के तेवर ने मौसम फिर गर्म कर दिया है। तीन दिन पहले तक गुलाबी सर्दी का अहसास हो रहा था। अब गर्मी बढ़ने लगी तो गला सूखने लगा है। ऐसे में प्यास बुझाने के लिए इस्तेमाल होने वाला फ्रिज का ठंडा पानी लोगो को बीमार कर रहा है। लिहाजा मिट्टी का मटका बेहतर विकल्प बन रहा है।
इन दिनों शहर में परंपरागत मिट्टी के मटकों की कई वैरायटी आ चुकी हैं। राजस्थान से आए मटके हर किसी को पसंद आ रहे हैं। ये मटके सामान्य मटकों की तुलना में पानी ज्यादा ठंडा कर रहे हैं। ये मटके सामान्य रंग रूप में अन्य मटकों से अलग हैं। इन पर पेटिंग खूबसूरती में चार चांद लगा रही है। शहर के बीएच ऑयल मिल रोड की ओर जाने पर ये मटके लोगों को अपनी ओर ध्यान खींच रहे हैं। बाजार में साधारण मटका सत्तर रुपये का है। राजस्थानी मटका साढ़े चार सौ रुपये तक बिक रहा है। मटका बेचने वालों ने एक लीटर की बोतल भी मंगवाई हैं। मिट्टी का वाटर कूलर चार सौ रुपये का मिल रहा है।
अच्छा होता है मटके का पानी
मटके या मिट्टी की बोतल का पानी प्लास्टिक की बोतल से बेहतर होता है। इसका पानी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसके अलावा मानव शरीर की प्रकृति अम्लीय होती है और इस पानी में क्षारीय गुण होते है, जो शरीर का पीएच स्तर संतुलित रखता है। यह पाचन में सुधार करता है।
कई दिनों से मटको की बिक्री काफी धीमी चल रही थी। अब फिर से गर्मी बढ़ गई है। मटकों की खरीद रफ्तार पकड़ रही है। राजस्थान से मिट्टी के मटके वाटर कूलर के अलावा मिट्टी की बोतल मंगाई गई है। सत्तर रुपये से चार सौ रुपये तक का मटका है। मीना विक्रेता।
फ्रिज का पानी सर्दी जुकाम कर रहा है। इस कारण मटका खरीदने के लिए आए हैं। राजस्थान वाले मटकों पर पेटिंग अच्छी लग रही है। राजस्थान का मटका पानी ठंडा ज्यादा करता है। अनुज शर्मा, ग्राहक।