जिले में जब तक बीमारियां दस्तक न दे दें, तब तक जिम्मेदार महकमे नींद से जागते नजर नहीं आते। नगर निकायों से लेकर ग्राम पंचायतों तक एंटी-लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग कराने के नाम पर केवल खानापूरी की जा रही है, जिससे मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। संचारी रोग नियंत्रण अभियान सिर्फ कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है।
नगर पालिका परिषद के वार्ड 11 के सभासद धर्मेंद्र कुमार पिप्पल ने बताया कि उनके क्षेत्र में न तो एंटी लार्वा का छिड़काव हुआ है और न ही फॉगिंग कराई गई है। दयानतपुर से लेकर गढ़ी तमना तक जलभराव, नाली चौक और गंदगी की गंभीर समस्या बनी हुई है।
वार्ड 35 के सभासद मनीष अग्रवाल का कहना है कि पूरे क्षेत्र में छिड़काव नहीं हुआ है। एक दिन कर्मचारी दिखे भी तो केवल फोटो खिंचाकर औपचारिकता पूरी करते नजर आए। यही बदहाली ग्रामीण इलाकों में भी है।
ग्राम पंचायत लाड़पुर के प्रधान कृष्ण गोपाल माहौर ने बताया कि न तो अप्रैल माह में और न ही अब तक कोई टीम एंटी लार्वा का छिड़काव करने या फॉगिंग कराने पहुंची है। ग्राम पंचायत गंगौली की प्रधान मीना देवी ने बताया कि गांव में पिछले तीन महीनों से एक भी सफाई कर्मी तैनात नहीं है। ऐसे में एंटी-लार्वा और फॉगिंग तो बहुत दूर की बात है।
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बजट होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग पर निर्भर निकायें
संचारी रोग नियंत्रण की जिम्मेदारी नगर विकास, पंचायतराज, पशुपालन, बाल विकास, शिक्षा, कृषि और उद्यान सहित करीब 13 विभागों को सौंपी गई है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर जगह-जगह जलभराव, उगीं झाड़ियां और गंदगी का साम्राज्य मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है। खुद का बजट होने के बावजूद नगर निकाय एंटी लार्वा केमिकल के लिए स्वास्थ्य विभाग के मुंह ताकते रहते हैं। मांग किए जाने पर स्वास्थ्य विभाग ने नगर पालिका परिषद हाथरस और सिकंदराराऊ को केवल पांच-पांच लीटर एंटी-लार्वा केमिकल उपलब्ध कराया है, जबकि अन्य निकाय भी स्वास्थ्य विभाग से ही रसायन की गुहार लगा रही हैं।
इस तरह होता है एंटी लार्वा का आवंटन
स्वास्थ्य विभाग में ई-टेंडर के माध्यम से मुख्य रूप से टेमेफॉस 50% ईसी की खरीद होती है। बाजार में इसकी कीमत ब्रांड के अनुसार 550 से 1780 रुपये प्रति लीटर तक होती है। जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय को पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी केवल 200 लीटर एंटी लार्वा केमिकल प्राप्त हुआ है। इसमें से संचारी रोग अभियान के तहत प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को 10-10 लीटर का आवंटन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के मानकों के अनुसार 10 लीटर पानी में 2.5 मिलीलीटर एंटी-लार्वा केमिकल मिलाकर छिड़काव कराया जाता है।
अब तक सामने आए चार मरीज
जिले में समय से निवारक कदम न उठाए जाने के कारण इस वर्ष अब तक मलेरिया के चार मरीज सामने आ चुके हैं। सबसे पहले मुरसान के गांव दर्शना में एक महिला मलेरिया की चपेट में आई। इसके बाद सिकंदराराऊ के भैंसमई में एक महिला पॉजिटिव पाई गई। हाल ही में सिकंदराराऊ के गांव मीरपुर में एक साल का मासूम और हसायन के नगला विजन में एक महिला मलेरिया पॉजिटिव मिली है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष जिले में मलेरिया के 22 और डेंगू के 22 मामले सामने आए थे।
संचारी रोग नियंत्रण अभियान के अंतर्गत सभी सीएचसी को एंटी लार्वा उपलब्ध करा दिया गया है। क्षेत्र में इसका छिड़काव कराया जा रहा है।
डॉ. वेदप्रकाश अग्रवाल, सीएमओ
पालिका को स्वास्थ्य विभाग की ओर से ही एंटी लार्वा केमिकल उपलब्ध करा जाता है। एंटी लार्वा मिल चुका है, जिसका छिड़काव वार्डों में करा रहे हैं।
-रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका