कांप्लेक्स और डिपार्टमेंटल स्टोर्स की मनमानी
शहर में 17 ऐसे पुराने कॉम्प्लेक्स हैं, जहां सुरक्षा के नाम पर एक भी मानक पूरा नहीं किया गया है। तंग गलियों और बिना वेंटिलेशन व सैट बैक के बने ये कांप्लेक्स बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। अलीगढ़-आगरा रोड स्थित तीन बड़े ब्रांडेड डिपार्टमेंटल स्टोर्स ने फायर सेफ्टी सिस्टम लगाकर एनओसी तो हासिल कर ली है, लेकिन धरातल पर वे सेट बैक (आसपास खाली जगह) और फायर एग्जिट (आपातकालीन निकास) के मामले में पूरी तरह शून्य हैं। आपातकाल में यहां से लोगों का निकलना नामुमकिन होगा। अलीगढ़ रोड स्थित एक बड़े डिर्पाटमेंटल स्टोर में तीन महीने पहले एसडीएम व सीएफओ को निरीक्षण के दौरान खामी मिली थीं, इस पर नोटिस भी थमाया गया था। शहर में बीच बाजार नयागंज स्थित तीन मंजिला डिपार्टमेंटल स्टोर में फायर सेफ्टी सिस्टम तो लगा है, लेकिन फायर एग्जिट व सैटबैक नहीं है।
रिहायशी इलाकों में अवैध फैक्टरियां
नियमों को ताक पर रखकर शहर के घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में पुरानी फैक्टरियां और उद्योग धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। रिहायशी इलाका होने के बावजूद इनके पास कोई फायर एनओसी नहीं है। संकरी गलियों के कारण यहां हादसे के समय दमकल वाहनों का पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। 22 अक्तूबर को नवीपुर में कारपेट की फैक्टरी में लगी आग के समय यही दिक्कत सामने आई थी। इन फैक्टरियों पर भी एनओसी नहीं है।
दिल्ली और मुजफ्फरपुर जैसी घटनाएं न हों, इसके लिए जिलाधिकारी स्तर से पहले ही मुख्य अग्रिशमन अधिकारी व अन्य संबंधित विभागों को पत्र जारी कर दिया गया है, ताकि सेफ्टी ऑडिट कराया जा सके। जिन भवनों में कमी पाई जाएगी, उन्हें सील कराया जाएगा। आग से निपटने के पूरे इंतजाम होने पर ही भवनों में व्यवसायिक गतिविधियां की जा सकेंगी।-प्रशांत तिवारी, एडीएम।
शहर में दो ही बड़े होटल हैं, जिनके पास फायर की एनओसी हैं। इसी तरह बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर्स व फैक्टरियों पर भी एनओसी है। समय-समय पर निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों की जांच की जाती है।-दीपक कुमार, एफएसओ।