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क्यों रहता है हादसे का इंतजार: न फायर एनओसी-न मानक पूरे, लाखों कमाने वाले सुरक्षा मानकों से कर रहे खिलवाड़

Fri, 05 Jun 2026 12:17 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

हाथरस में कुल 24 छोटे-बड़े रेस्टोरेंट और ढाबे संचालित हैं, अधिकांश के पास पर्याप्त अग्निशमन यंत्र तक नहीं हैं, एनओसी तो बहुत दूर की बात है। इनके अलावा सात से आठ कमरों वाले लगभग 18 छोटे होटल व गेस्ट हाउस भी बिना एनओसी के ही चल रहे हैं।
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जिला अस्पताल के पीछे निर्माणाधीन भवन के पीछे नहीं छोड़ा गया सेटबैक - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हाथरस शहर में व्यावसायिक गतिविधियों से लाखों रुपये कमाने वाले सुरक्षा मानकों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बिना फायर एनओसी और बिना सुरक्षा मानकों के धड़ल्ले से चल रहे मॉल, कॉम्प्लेक्स, होटल और फैक्टरियां किसी बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि पूरा शहर ही हॉट स्पॉट बन चुका है। अग्रिकांड से बचाव के नाम पर एक दमकल गाड़ी बस स्टैंड पर खड़ी कर दी गई है।

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शहर के कई व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और गोदामों में पूर्व में भीषण अग्निकांड हो चुके हैं, जिनमें लाखों रुपये का नुकसान हुआ और जान पर भी बन आई। इसके बावजूद न तो व्यापारी चेते हैं और न ही संबंधित विभाग सख्त कदम उठा रहा है। शहर में फायर एनओसी लेने और मानकों को पूरा करने का जैसा कोई चलन ही नहीं है। 22 फरवरी 2026 की रात सरर्कुलर रोड स्थित चेतन कांप्लेक्स में भीषण आग लगी थी। कांप्लेक्स में वेंटिलेशन व सेटबैक न होने से धुआं भर गया था और दमकल कर्मियों को काफी मुश्किलें हुईं थीं।

24 छोटे बड़े रेस्टोरेंट राम भरोसे
शहर में कुल 24 छोटे-बड़े रेस्टोरेंट और ढाबे संचालित हैं, अधिकांश के पास पर्याप्त अग्निशमन यंत्र तक नहीं हैं, एनओसी तो बहुत दूर की बात है। इनके अलावा सात से आठ कमरों वाले लगभग 18 छोटे होटल व गेस्ट हाउस भी बिना एनओसी के ही चल रहे हैं। शहर में खान-पान और ठहरने के बड़े-बड़े ठिकाने तो खुल गए हैं, लेकिन सुरक्षा के मामले में ये खोखले हैं। मात्र दो बड़े होटल हैं (जो अलीगढ़ रोड पर स्थित हैं) जिनके पास फायर एनओसी है।

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कांप्लेक्स और डिपार्टमेंटल स्टोर्स की मनमानी
शहर में 17 ऐसे पुराने कॉम्प्लेक्स हैं, जहां सुरक्षा के नाम पर एक भी मानक पूरा नहीं किया गया है। तंग गलियों और बिना वेंटिलेशन व सैट बैक के बने ये कांप्लेक्स बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। अलीगढ़-आगरा रोड स्थित तीन बड़े ब्रांडेड डिपार्टमेंटल स्टोर्स ने फायर सेफ्टी सिस्टम लगाकर एनओसी तो हासिल कर ली है, लेकिन धरातल पर वे सेट बैक (आसपास खाली जगह) और फायर एग्जिट (आपातकालीन निकास) के मामले में पूरी तरह शून्य हैं। आपातकाल में यहां से लोगों का निकलना नामुमकिन होगा। अलीगढ़ रोड स्थित एक बड़े डिर्पाटमेंटल स्टोर में तीन महीने पहले एसडीएम व सीएफओ को निरीक्षण के दौरान खामी मिली थीं, इस पर नोटिस भी थमाया गया था। शहर में बीच बाजार नयागंज स्थित तीन मंजिला डिपार्टमेंटल स्टोर में फायर सेफ्टी सिस्टम तो लगा है, लेकिन फायर एग्जिट व सैटबैक नहीं है।

रिहायशी इलाकों में अवैध फैक्टरियां
नियमों को ताक पर रखकर शहर के घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में पुरानी फैक्टरियां और उद्योग धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। रिहायशी इलाका होने के बावजूद इनके पास कोई फायर एनओसी नहीं है। संकरी गलियों के कारण यहां हादसे के समय दमकल वाहनों का पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। 22 अक्तूबर को नवीपुर में कारपेट की फैक्टरी में लगी आग के समय यही दिक्कत सामने आई थी। इन फैक्टरियों पर भी एनओसी नहीं है।
दिल्ली और मुजफ्फरपुर जैसी घटनाएं न हों, इसके लिए जिलाधिकारी स्तर से पहले ही मुख्य अग्रिशमन अधिकारी व अन्य संबंधित विभागों को पत्र जारी कर दिया गया है, ताकि सेफ्टी ऑडिट कराया जा सके। जिन भवनों में कमी पाई जाएगी, उन्हें सील कराया जाएगा। आग से निपटने के पूरे इंतजाम होने पर ही भवनों में व्यवसायिक गतिविधियां की जा सकेंगी।-प्रशांत तिवारी, एडीएम।
शहर में दो ही बड़े होटल हैं, जिनके पास फायर की एनओसी हैं। इसी तरह बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर्स व फैक्टरियों पर भी एनओसी है। समय-समय पर निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों की जांच की जाती है।-दीपक कुमार, एफएसओ।
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