पशुओं का घर बैठे उपचार मुहैया कराने के लिए यहां जिले में आए पांच वेटेरिनरी (पशु चिकित्सा) वाहन इन-दिनों महज राजकीय पशु चिकित्सालयों की शोभा बढ़ा रहे हैं। स्टाफ की तैनाती न होने के कारण यह वाहन पशुपालकों को मुहैया नहीं हो पा रहे हैं। पशुपालन विभाग की ओर पिछले दिनों इन सभी वाहनों को कलेक्ट्रेट से हरी झंडी दिखाकर रवाना कराया गया था। वहां से रवाना होने के बाद यह सभी वाहन पशु चिकित्सालयों में जाकर खड़े हो गए हैं।
शासन की ओर से जिले में पालतू मवेशियों को घर पर ही उपचार मुहैया कराने के लिए जिले में पांच चिकित्सा वाहन भेजे गए थे। 1962 नंबर डायल करने पर इन वाहनों से मवेशियों को घर पहुंचकर सुविधा देने की योजना थी। इन वाहनों को कलेक्ट्रेट से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इन वाहनों में एक चिकित्सक, एक हेल्पर व एक चालक को तैनात किया गया है।
हैरानी की बात यह है कि इन वाहनों पर अभी तक किसी भी कर्मचारी की तैनाती नहीं की गई है। हालांकि शासन की ओर से दो वाहनों के लिए स्टाफ भेजा गया है, लेकिन इस स्टाफ से विभागीय अधिकारी शिविर लगवाकर खानापूर्ति कर रहे हैं। वाहनों में दवा तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी विजयवीर चंद्रयान ने बताया कि दो वाहनों के लिए स्टाफ भेजा गया है। अन्य वाहनों पर अभी स्टाफ तैनात नहीं किया गया है।
शासन की ओर से एक फोन पर पशुओं के उपचार के लिए वाहन उपलब्ध होने की सूचना मिलते ही काफी अच्छा लगा था। सोचा था कि अब पशुओं को अस्पताल तक ले जाने की मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। अब भी पशुओं को उपचार के लिए अस्पताल ही ले जाना पड़ रहा है।
-ओमप्रकाश, झींगुरा
पशुओं के घर-घर जाकर उपचार के लिए शुरू हुई सुविधा का अभी तक लाभ नहीं मिल पाया है। अब भी पशुओं के उपचार के लिए निजी चिकित्सक को ही घर बुलाना पड़ता है। मोबाइल वेटेरिनरी वैन से कोई उपचार करने नहीं आया है।
-सर्वेश, जैनी गढ़ी