सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मन चेतना दिवस के आयोजन में घोर लापरवाही सामने आई है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद शासन ने इस मामले का संज्ञान लिया है। सीएमओ को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के मानसिक रोगियों को उपचार से जोड़ने के लिए हर बृहस्पतिवार को मन चेतना दिवस होता है। इस दिन विशेष ओपीडी आयोजित करने और परामर्श कर मरीजों को मन कक्ष तक भेजने के निर्देश हैं। अमर उजाला ने 11 सितंबर को मनमाना मन चेतना दिवस : कहीं ओपीडी नहीं तो कहीं मरीज नहीं पहुंचे शीर्षक से खबर छापी थी।
जिले में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और आत्महत्या के बढ़ते मामलों के बावजूद यह आयोजन कागजों तक सीमित रह गया है। सीएचसी पर ओपीडी के लिए चिकित्सकों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। हालांकि, मन कक्ष के अलावा जिले में कहीं भी परामर्श की व्यवस्था नहीं है। मन कक्ष में एक चिकित्सक और एक परामर्शदाता हैं, जहां रोजाना 20 मरीजों का औसत रहता है।
आयोजन में लापरवाही
मन चेतना दिवस का उद्देश्य मानसिक बीमारियों से ग्रसित लोगों को उपचार से जोड़ना है। इसके तहत हर बृहस्पतिवार को विशेष ओपीडी और परामर्श का प्रावधान है। लेकिन यह आयोजन केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है, जिससे मरीजों को लाभ नहीं मिल रहा।