सरकारी गाड़ियों के चालकों की लापरवाही पर सवाल उठने लगे हैं। पिछले 15 दिनों में सरकारी वाहनों से हुए दो हादसों में चार लोगों की जान जा चुकी है। दोनों ही घटनाओं में सरकारी विभागों की गाड़ियां हादसे की वजह बनीं। इन घटनाओं के बाद सरकारी वाहनों के चालकों की रफ्तार और सड़क पर बरती जाने वाली सावधानी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
14 अगस्त की शाम हाथरस जंक्शन क्षेत्र में सलेमपुर कट के पास मोपेड सवार तीन लोगों को नायब तहसीलदार की कार ने टक्कर मार दी थी। हादसे में छह साल के बच्चे, उसके बाबा और गांव के एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई थी। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और जमकर बवाल हुआ था।
अभी इस घटना को 15 दिन भी नहीं बीते थे कि 27 अगस्त की शाम मथुरा रोड पर कलक्ट्रेट के निकट डीएसओ की गाड़ी ने बाइक सवार तीन लोगों को टक्कर मार दी। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने सरकारी वाहनों के संचालन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
सरकारी अधिकारियों के आवागमन के लिए इस्तेमाल होने वाली कई गाड़ियों में हूटर और मल्टीकलर बत्ती लगी रहती है। आरोप है कि कई बार अधिकारी वाहन में मौजूद हों या नहीं, चालक हूटर और बत्ती का इस्तेमाल करते हुए तेज रफ्तार में वाहन दौड़ाते हैं। आम वाहन चालकों की तुलना में सरकारी वाहनों को सड़क पर अधिक जिम्मेदारी और सावधानी के साथ चलाने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन हादसों ने इस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यातायात के नियमों की अनदेखी से ही हादसे हुए हैं। प्रकरण में जांच कराई जा रही है कि हादसा किन कारणों से हुआ। सरकारी गाड़ियों के चालकों को भी यातायात के नियमों के पालन के निर्देश दिए जाते हैं। यातायात के नियमों के प्रति जागरूकता के लिए कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी।
-रामानंद कुशवाहा, एएसपी