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काका हाथरसी पुरस्कार ट्रस्ट के अध्यक्ष थे नीरज

Thu, 19 Jul 2018 11:38 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
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Gopaldas Neeraj
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 महान गीतकार पद्मभूषण गोपाल दास नीरज के निधन खबर पर स्थानीय साहित्यकारों में शोक की लहर दौड़ गई। गोपाल दास नीरज का इस शहर से विशेष लगाव था। वह अक्सर यहां होने वाले कवि सम्मेलनों में आया करते थे। यहां के साहित्यकारों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। इसे साहित्य जगत के लिए काफी अपूर्णनीय क्षति बताया है। नीरज जी इस शहर की शान काका हाथरसी के नाम से दिए जाने वाले काका हाथरसी पुरस्कार ट्रस्ट के अध्यक्ष भी थे।  
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गोपाल दास नीरज जी का निधन साहित्य जगत के लिए बड़ी क्षति है, जिसे पूरा नहीं किया जा सकता। नीरज जी ने मंचीय कवि तो थे ही, साथ ही उन्होंने फिल्मों के लिए भी यादगार गीत लिखे। काका जी का तो उनसे बेहद लगाव था और दोनों ने काफी कवि सम्मेलनों में साथ-साथ काव्य पाठ किया। नीरज जी काका हाथरसी पुरस्कार ट्रस्ट के अध्यक्ष भी थे। वह अक्सर मुंबई में मुझे मिल जाया करते थे । मैं भी वहां बतौर संगीत निर्देशन के तौर पर काम करता था।  
- डॉ लक्ष्मी नारायण गर्ग, काका हाथरसी के पुत्र और प्रधान संपादक, संगीत पत्रिका

नीरज जी इस देश के सबसे बडे कवि और गीतकार थे। साहित्य जगत में उनका जो स्थान है , उसे कोई नहीं ले सकता। जब तक विश्व रहेगा उनके गीतों को गुनगुनाया जाता रहेगा। मेरा नीरज जी बेहद लगाव था, मैने और उन्होंने काफी कवि सम्मेलनों में साथ साथ भाग लिया। उनका आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ रहा।  
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सबरस मुरसानी, हास्य कवि 

नीरज जी का निधन साहित्य जगत के लिए अपूर्णनीय क्षति है। नीरज जी जैसा गीतकार और कवि न हुआ और न होगा। उनके गीत सदाबहार है। जब वह हाथरस के कवि सम्मेलनों में आते थे तो रात-रात भर लोग उनके गीतों को सुनने के लिए बैठे रहा करते थे।  
- गोपाल चतुर्वेदी, साहित्यकार

गोपाल दास नीरज हिंदी के उन चुनिंदा गीतकारों में एक थे, जिन्होंने मंच के साथ साथ फिल्म जगत में भी बेहद नाम और सम्मान पाया। उनके गीतों को दुनिया हमेशा याद रखेगी। उन्होंने हिंदी साहित्य को बेहद समृध्द किया। वह अक्सर हाथरस आते थे। तो यहां हजारों की भीड़ मंच पर उन्हें सुनने के लिए बेताब रहती थी। 

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- अनिल बौहरे, आशु कवि 

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