हाथरस। शहर के विकास के लिए बनी 232 करोड़ रुपये की अमृत योजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी शुरू हो गई है। योजना के संबंध में लखनऊ में अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पालिका चेयरमैन और जेई को लखनऊ में हुई बैठकों में अमृत योजना के तहत किस तरह काम कराए जाने हैं, इस बारे में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब बोर्ड बैठक में अमृत योजना का प्रस्ताव पास होते ही शहर में विकास कार्य शुरू कराने का रास्ता साफ हो जाएगा।
योजना के तहत शहर की सीवरेज, ड्रेनेज, पेयजल आपूर्ति, कब्रिस्तान और पार्कों का सौंदर्यीकरण होना है। चेयरमैन द्वारा अमृत योजना से शहर का विकास कराए जाने के लिए 232 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था, जिसे अभी मंजूरी मिलना बाकी है। शासन स्तर पर यह प्रस्ताव इसलिए लटका है, क्योंकि अभी तक नगर पालिका बोर्ड ने इस पर अपनी स्वीकृति की मोहर नहीं लगाई है। अमृत योजना से शहर में जलभराव की समस्या से निजात मिलेगी। सड़कें भी दुरुस्त हो जाएंगी। पेयजल आपूर्ति के लिए गर्मियों में लोगों को भटकना पड़ता है, उससे भी निजात मिलेगी। शहर के पार्क बदहाल पड़े हुए हैं। पार्कों का सौंदर्यीकरण होने से भी लोगों को पार्कों में बैठने की सुविधा और स्वच्छ वातावरण मिलेगा। कब्रिस्तान भी बदहाल है उनका भी सौंदर्यीकरण होगा।
विकास के लिए लखनऊ में प्रशिक्षणअमृत योजना से शहर का विकास किस तरह होना है, इस संबंध में लखनऊ और दिल्ली में पिछले दिनों चयनित नगर पालिका के अधिकारियों और अध्यक्षों को प्रशिक्षण दिया गया। बैठक में पालिका चेयरमैन डौली माहौर, उनके प्रतिनिधि वासुदेव माहौर, पालिका के जेई व जलकल संस्थान के जेई शामिल हो चुके हैं। बैठकों में अधिकारियों को ई-टेंडरिंग की भी जानकारी दी गई। वहीं चेयरमैन से शहर की समस्याओं की जानकारी ली गई।
- अमृत योजना शहर के विकास के लिए महत्वपूर्ण योजना है। 232 करोड़ के प्रस्ताव बनाकर भेज दिए गए हैं। आचार संहिता खत्म होने के बाद बोर्ड की बैठक में अमृत योजना के प्रस्ताव रखे जाएंगे। इसी सप्ताह पुन: दिल्ली में बैठक होगी, जिसमें जेई व चेयरमैन भी शामिल होंगे। - वासुदेव माहौर, चेयरमैन प्रतिनिधि।