अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या तीन ने हत्या के मामले में एक आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। इस मामले में तीन आरोपियों की पूर्व में मृत्यु हो चुकी है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार सादाबाद कोतवाली में इसका मुकदमा दर्ज हुआ था। तहरीर में कहा गया था कि 9 जुलाई 2007 को सुबह 9 बजे वादी वीरेंद्र सिंह का भाई राजू अपने गांव से सादाबाद जा रहा था, इसी दौरान सादाबाद में राया रोड पर चार लोगों ने उसे रोककर गालीगलौज की और पीटा। पीटने वालों में ज्वाला, देवीराम, पुरुषोत्तम और राजू पुत्रगण उमराव सिंह शामिल थे।
पीड़ित राजू ने इसकी सूचना सादाबाद बस स्टैंड के पास स्थित एक होटल पर अपने भाई वीरेंद्र और सतीश को दी। इसके बाद राजू अपने दो भाइयों वीरेंद्र और सतीश के साथ गांव मडनई पहुंचा। वहां आरोपियों ने राजू और उसके भाई सतीश पर गोलियां चलाईं। इस हमले में राजू की मौत हो गई और सतीश गंभीर रूप से घायल हो गया।
विवेचक ने विवेचना करते हुए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान तीन आरोपी-ज्वाला, पुरुषोत्तम और राजू की मौत हो गई। इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या तीन हर्ष अग्रवाल के न्यायालय में हुई।
न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत एकमात्र जीवित आरोपी देवीराम को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी प्रतिभा राजपूत ने पैरवी की।