शासन की हौसला पोषण मिशन योजना में ग्राम पंचायतें लगातार बाधक बन रही हैं। मिशन के लिए शासन की ओर से मिलने वाली धनराशि ग्राम पंचायतों के खातों में जा रही है, लेकिन जनप्रतिनिधि इस पैसे से अपने स्वार्थ साधने की जुगत में है।
निर्धारित समय में पैसा नहीं निकलने से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का योजना के संचालन में मुश्किल हो रही है। बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने इस बारे में जिला कार्यक्रम अधिकारी को शिकायत सौंपी है। सीडीओ जावेद अख्तर जैदी इन शिकायतों को लेकर काफी गंभीर हैं।
हौसला पोषण मिशन में शासन की नीति के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में आंगनबाड़ी कार्यकत्री और ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में धनराशि भेजी जाती है, जिससे इस पैसे का सदुपयोग हो सके और महिलाओं एवं बच्चों को कुपोषण की समस्या से मुक्ति दिलाई जा सके।
इसके लिए समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा महिलाओं और बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया जा रहा है, जिससे महिलाओं और बच्चों को कुपोषण से मुक्ति के लिए समय-समय पर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराकर समस्या से मुक्त कराया जा सके।
डीएम अविनाशकृष्ण सिंह और सीडीओ जावेद अख्तर जैदी द्वारा जिले में मिशन के कामों का जिला स्तरीय अधिकारियों के माध्यम से लगातार निरीक्षण कराया जा रहा है। निरीक्षण में शिकायतें मिली हैं कि योजना के संचालन के लिए प्रधान पैसा निकालकर ही आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को नहीं दे रहे हैं, जिससे कार्यकत्रियां विधिवत रूप से मिशन का संचालन नहीं कर पा रही हैं।
उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी रामानंद को निर्देश दिए हैं कि मिशन में जिन ग्राम पंचायतों में पैसा नहीं निकल पा रहा है, उनकी पूरी सूची तैयार की जाए, ताकि डीएम के सामने इस समस्या को रखकर विधिवत रूप से कार्यकत्रियों के खातों का एकल संचालन शुरू कराके योजना का काम सुचारु कराया जा सके।