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Hathras News: बजट में मिला धन...पूरा देश चखेगा हाथरस की रबड़ी का स्वाद

Thu, 12 Feb 2026 02:09 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
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प्रदेश सरकार के बजट में एक जनपद-एक व्यंजन योजना के तहत हाथरस को एक करोड़ रुपये की धनराशि मिलने से स्थानीय उद्यमियों और कारीगरों में उत्साह है। शहर की महशूर रबड़ी को इस योजना में चयनित किया गया है। अब बजट में प्रावधान होने से रबड़ी के उत्पादन, पैकेजिंग और मार्केटिंग को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
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स्थानीय मिठाई कारोबारियों का कहना है कि सरकारी मदद मिलने से आधुनिक तकनीक के साथ रबड़ी का बड़े स्तर पर उत्पादन किया जा सकेगा। साथ ही बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग से जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। इससे छोटे दुकानदारों और कारीगरों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र अजलेश कुमार ने बताया कि योजना के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे, जिससे कारीगरों को गुणवत्ता में सुधार, स्वच्छता मानक और आधुनिक उत्पादन तकनीकों की जानकारी मिल सकेगी। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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कस्बा मेंडू में बड़े स्तर पर है रबड़ी-खोवे का कारोबार
शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में भी रबड़ी व खोवा का कारोबार बड़े स्तर पर होता है। इसमें कस्बा मेंडू काफी अहम है। यहां के दुकानदारों द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर भैंसों की खरीद कर दूध मंगाया जाता है, ताकि गुणवत्ता बेहतर रह सके। यहां से अभी तक हर रोज करीब पांच क्विंटल रबड़ी व खोवा दिल्ली भेजा जाता है, जबकि हाथरस शहर से करीब दो क्विंटल रबड़ी हर रोज दूसरे शहरों में जाती है।

300 से 360 रुपये किलो हैं रबड़ी के दाम
जिले में रबड़ी के दाम 300 रुपये प्रति किलो से लेकर 360 रुपये प्रति किलो तक हैं। शहरी क्षेत्र में रबड़ी करीब 360 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र से दिल्ली व अन्य शहरों में जाने वाली रबड़ी के थोक दाम गुणवत्ता के हिसाब से 300 से 350 रुपये किलो तक हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री को भी पसंद थी हाथरस की रबड़ी

हाथरस की रबड़ी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी बहुत पसंद थी। वह इसके मुरीद थे और कई बार यहां आकर इसका स्वाद ले चुके थे। खासकर हास्य सम्राट काका हाथरसी के आमंत्रण पर वह 1994 में हाथरस आए थे और यहां की रबड़ी का स्वाद लिया था, इस बात का जिक्र उन्होंने मंच से भी किया था। एक कवि के रूप में भी अटलजी यहां कई मंचों पर आए। वर्ष 1994 में काका हाथरसी पुरस्कार समारोह में भी वह मुख्य अतिथि के रूप में आए थे। इस कार्यक्रम में उन्होंने डॉ. राकेश शरद व भगवत शरण शर्मा को काका हाथरसी पुरस्कार से सम्मानित किया था। इस दौरान वह पूर्व पालिकाध्यक्ष रमेशचंद्र आर्य के आवास पर रुके। भोजन में उन्हें हाथरस की रबड़ी पसंद आई थी। इससे पहले भी अटल जी यहां अक्सर आते रहते थे।

वर्तमान में हाथरस की रबड़ी को दिल्ली और मुंबई तक के लोग पसंद करते हैं, लेकिन बजट में जिस तरह एक जनपद-एक व्यंजन योजना के तहत प्रोत्साहन दिया जा रहा है, उससे हाथरस की रबड़ी को देश में अलग पहचान मिल सकेगी।
-हेमंत वार्ष्णेय, मिठाई विक्रेता।



मिठाई के क्षेत्र में हाथरस की अपनी अलग पहचान है। कई प्रकार की मिठाइयां हाथरस से देश के कोने-कोने में जाती हैं, लेकिन बजट में प्रोत्साहन से उत्पादन के अलावा यहां की रबड़ी की पैकिंग व मार्केटिंग की आधुनिक व्यवस्थाओं का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
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-चिराग शर्मा, मिठाई विक्रेता।
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