हाथरस बाईपास पर हुए चर्चित कैलाश ढाबा गैंगवार मामले में सत्र न्यायालय ने कुख्यात मोना ठाकुर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनय कुमार तृतीय की अदालत ने अभियुक्त के लंबे-चौड़े आपराधिक इतिहास और संगीन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जमानत देने से इन्कार कर दिया।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियुक्त मोना ठाकुर के अधिवक्ता ने दलील दी कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया है और पुलिस की कार्रवाई को बेबुनियाद ठहराने की कोशिश की। एडीजीसी ने पुरजोर विरोध करते हुए अदालत के समक्ष अभियुक्त का आपराधिक रिकॉर्ड प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि मोना पर 22 आपराधिक मुकदमे हैं। कोर्ट ने मुकदमों की इस लंबी फेहरिस्त पर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि अभियुक्त की अपराध में सक्रिय भूमिका रही है और ऐसे गंभीर मामलों में जमानत का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता।
सरेआम हुई थी गोलीबारी, दहशत में भागे थे लोग
उल्लेखनीय है कि बीती 18 जून को हाथरस बाईपास स्थित कैलाश ढाबे के पास मोना ठाकुर और दूसरे विरोधी गैंग के बीच वर्चस्व और रंजिश के चलते सरेआम ताबड़तोड़ फायरिंग हुई थी। इसमें स्कॉर्पियो, वैगनआर कार और बुलेट सवार बदमाशों ने एक-दूसरे पर जान से मारने की नीयत से गोलियां बरसाईं। इस घटना से हाईवे और आसपास के ढाबों पर भगदड़ व अफरा-तफरी मच गई थी। पुलिस ने तीन जुलाई को मुठभेड़ में मोना को गिरफ्तार किया था। प्रकरण में संदीप, सूर्या, अनुज व अंकित के अलावा प्रकाश में आए चार अन्य अपराधी अभी फरार चल रहे हैं। ये लोग सरेंडर की फिराक में हैं।