वेंटिलेटर के संचालन के लिए न तो चिकित्सक हैं, न ही प्रशिक्षित स्टाफ। यहां ओटी टेक्नीशियन का पद खाली पड़ा है। 14 वार्ड आया, 20 वार्ड बॉय व 12 चपरासी के पद खाली पड़े हैं। वार्ड बॉय भी तीन शेष हैं। यहां 25 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, जिनके सापेक्ष 12 ही तैनात हैं।
जनरल सर्जन के दोनों पद खाली हैं। ऑर्थो सर्जन का दो में से एक पद खाली है। एनेस्थिसियोलॉजिस्ट के दोनों पद खाली पड़े हैं, ऑपरेशन के लिए मरीज को बेहोश करने वाला कोई नहीं। कॉर्डियोलॉजिस्ट, चेस्ट फिजीशियन, पैथोलॉजिस्ट के पद भी खाली हैं। मन कक्ष के लिए चिकित्सक नहीं हैं, ब्लड बैंक में एक ही चिकित्सक तैनात हैं, जबकि तीन शिफ्ट में कम से कम तीन तो होने ही चाहिए।
रेफर करने पड़े मरीज
सासनी के गांव समामई पर हुए हादसे में चार लोगों की मौत हुई और 21 घायल हुए। घायल महाराज सिंह को बचाया जा सकता था, लेकिन सिर की चोट में समय से उपचार नहीं मिला। यही नहीं जिला अस्पताल लाए गए आठ लोगों को यहां से रेफर करना पड़ा। सीटी स्केन, एक्स-रे व ब्लड बैंक की व्यवस्था होने के बावजूद इन्हें हेड इंजरी की वजह से रेफर करना पड़ा। सर्जन व प्रशिक्षित स्टाफ होता तो यहां उपचार संभव था।