एनसीईआरटी के 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम से मुगल दरबार की किताब को हटाने पर कुछ बुद्धिजीवियों ने कहा कि सरकार की यह पहल हिंदुत्व को बढ़ावा देगी। वहीं दूसरी ओर से सरकार के इस फैसले से धार्मिक भावनाएं आहत होने की बात भी कही जा रही हैं।
एनसीईआरटी के 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम से मुगल दरबार की किताब को हटाने को लेकर शिक्षाविदों व शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के अपने विचार हैं। कुछ बुद्धिजीवियों के अनुसार सरकार की यह पहल हिंदुत्व को बढ़ावा देगी। वहीं दूसरी ओर से सरकार के इस फैसले से धार्मिक भावनाएं आहत होने की बात भी कही जा रही हैं।
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शिक्षाविदों का कहना है कि पाठ्यक्रम में सभी राजाओं द्वारा किए गए राज की जानकारी को शामिल किया जाना चाहिए, जिससे सभी को हर राजा के राज्य व उनके दौर में हुए कार्यों के बारे में जानकारी मिल सके।
सर्वधर्म सद्भाव चलना चाहिए। हमारी तो वसुधैव कुटुंबकम की परंपरा रही है। हमारे देश में सभी धर्म समान हैं। यह एक तरफ तो अच्छी पहल है। हमें अपनी वंशावली पढ़ानी चाहिए। हमें यह भी जानकारी भी देनी चाहिए कि मुगलों या अन्य किसी से युद्ध में हमारे योद्धाओं ने कितनी वीरता दिखाई। वास्तविकता को जरूर दिखाना चाहिए। देश के भावी कर्णधारों को पूरा इतिहास पता होना चाहिए, सत्य छपना चाहिए। -डॉ. एससी शर्मा, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक
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सरकार को जितने भी शासक हुए हैं, उन सबके बारे में जानकारी देनी चाहिए। अब तक मुगलों को ही ज्यादा पढ़ाया गया है। बच्चों को हर शासक के बारे में इन किताबों के जरिए ही जानकारी मिल सकती है, इसलिए सभी शासकों के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी इन शासकों के शौर्य और पराक्रम से परिचित हो सके और अपने देश के इतिहास को गहराई तक समझ सके। -योगेंद्र कुमार, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक