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हाथरस में नहीं बंटा दूध, लोग रहे परेशान 

Wed, 13 Dec 2017 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस। 
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दूध - फोटो : Amar Ujala
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 दूध उत्पाद बनाने वाली देश की नामी कंपनियों द्वारा दूध खरीद के दामों में भारी कटौती किए जाने से परेशान दुग्ध उत्पादकों ने बुधवार से हड़ताल शुरू कर दी। दुग्ध विक्रेताओं ने चिलिंग प्लांटों और डेयरियों पर दूध की सप्लाई नहीं की, इस वजह से चिलिंग प्लांटों और दूध डेयरियों पर सन्नाटा पसरा रहा। लोग दूध नहीं मिलने से परेशान रहे। कंपनियों के इस निर्णय से जिले के तकरीबन 25 हजार दुग्ध उत्पादक किसान प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि कंपनियों ने जो रेट तय किया है, उसमें खर्च निकालना भी दूभर हो गया है।
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 हाथरस में प्रतिदिन होने वाला करीब 10 लाख लीटर दुग्ध उत्पादन के कारोबार पर बुरा असर पड़ा है, जिसका टर्न ओवर करीब चार करोड़ रुपये है। दुग्ध उत्पाद बनाने वाली कंपनियों ने दूध खरीद की दरों में 18 से 20 रूपये लीटर की कमी कर दी है। अब दूध के थोक रेट सिर्फ 25 से 28 रुपये प्रति लीटर रह गए हैं। इससे दुग्ध उत्पादकों को जबर्दस्त नुकसान हुआ है। काफी संख्या में ग्रामीण आबादी सिर्फ पशुपालन पर निर्भर है। ऐसे में रोजी रोटी पर आए संकट से यह दुग्ध उत्पादक बेहद परेशान और निराश हो गए हैं।

बुधवार को जिले के दुग्ध उत्पादकों ने न तो किसी चिलिंग प्लांट पर दूध पहुंचाया और न ही किसी डेयरी पर। इस वजह से चिलिंग प्लांट और डेयरियों पर सन्नाटा पसरा रहा। सादाबाद में इस हड़ताल का सर्वाधिक असर देखा गया। चोरी-छिपे दूध पहुंचा रहे कुछ लोगों से दुग्ध उत्पादकों की नोक-झोंक भी हुई। दूध खरीदने वाले लोग बेहद परेशान रहे। दूध विक्रेता भी दूध का वितरण करने घर-घर नहीं पहुंचे। दुग्ध विक्रेताओं का कहना था कि जब तक स्थित पूर्व की तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी। 
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बातचीत- 
-कोई दुग्ध उत्पादक दूध लेकर डेयरी नहीं पहुंचा। इससे काफी नुकसान हुआ है। दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध के पर्याप्त दाम मिलने चाहिए। दुग्ध कारोबार पर आए संकट के समाधान के लिए प्रशासन को भी हल निकालना चाहिए।
-विष्णु, डेयरी संचालक, हाथरस, दुग्ध उत्पादक 

-25 रुपये लीटर में तो पशुपालन का खर्चा भी निकल पाएगा। इतने से अधिक रुपये की खुराक तो भैंस की हो जाती है। 25 रुपये लीटर की दर से दूध बेचने से नुकसान सहना होगा।
-श्यामवीर सिंह, दरकई 

-कहां से इतने कम रेटों में दूध की सप्लाई करेंगे। रोजी-रोटी कैसे चलेगी। वह तो सिर्फ दूध बेचकर ही अपना गुजारा करते हैं। इस समस्या का समाधान शीघ्र होना चाहिए।
-सतीश कुमार, परसारा, दुग्ध उत्पादक 

-सरकार को दुग्ध उत्पादकों की समस्या पर ध्यान देनाचाहिए। कंपनियों की मनमानी पर रोक लगानी चाहिए, जिससे कि पूर्व की तरह ही दूध की बिक्री हो सके और उनकी रोजी रोटी चल सके।
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-शिशुपाल, कटैलिया, दुग्ध उत्पादक 
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