घर जाने के लिए टेंपो पर सामान लादते प्रवासी कामगार।
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संवाद न्यूज एजेंसी, सिकंदराराऊ।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच घर से सैकड़ों किमी दूर रहकर नौकरी कर रहे प्रवासी मजदूर अब घर लौटने की हड़बड़ी में हैं। इसके लिए उन्हें टुकड़ों में यात्रा करनी पड़ रही है। हालांकि लोक परिवहन सेवा चालू रहने से इस बार उन्हें पैदल तो सफर नहीं करना पड़ रहा, लेकिन चुनाव ड्यूटी में बसें लगने के कारण उन्हें वाहनों की किल्लत से जरूर दो-चार होना पड़ रहा है। मजबूरी में उन्हें ऑटो रिक्शा और अन्य वाहनों से यात्रा करनी पड़ रही है।
इस बार कोरोना का संक्रमण ज्यादा विनाशकारी साबित हो रहा है। शासन को फिलहाल मरीजों के लिए ऑक्सीजन, इंजेक्शन और बेड की व्यवस्था की चिंता है। फिलहाल प्रवासी मजदूरों की किसी को कोई चिंता नहीं है। बड़े शहरों में चूंकि संपूर्ण लॉकडाउन लग चुका है। ऐसे में इन मजदूरों के सामने वहां रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
उनके सामने घर वापस लौटने के सिवाय दूसरा कोई चारा नहीं है। यही वजह है कि वह किसी तरह घर लौटने की जद्दोजहद में लगे हैं। घर लौटने के लिए उन्हें टुकड़ों में वाहनों से यात्रा करनी पड़ रही है। महोबा का परिवार ऑटो रिक्शा से एटा के लिए जा रहा था। यह ऑटो रिक्शा रास्ते में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस कारण रास्ते में ही एक मजदूर की मौत हो गई।
इसी प्रकार छिबरामऊ जाने के लिए जब कोई वाहन नहीं मिला तो परिवार ने ऑटो रिक्शा ही भाड़े पर ले लिया। दिन रात ट्रकों, बसों और ऑटो रिक्शा में सैकड़ो प्रवासी मजदूर परिवार घर लौटने को मजबूर हैं। इस बार न सरकार और न प्रशासन उन्हें कोई मदद मुहैया करा पा रहा है। रोडवेज बसें भी चुनाव ड्यूटी में लगा दी गई हैं। लंबी दूरी की रोडवेज बसें एक बार चलने के बाद डिपो में जाकर खड़ी हो रही हैं।