जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों के सामने मध्याह्न भोजन का संकट खड़ा हो सकता है। अगस्त महीने के 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन वित्तीय वर्ष 2026-27 की द्वितीय तिमाही (जुलाई से सितंबर) के लिए आवंटित खाद्यान्न का उठान अब तक शुरू ही नहीं हो सका है। अगर जल्द उठान नहीं हुआ तो विभागीय लापरवाही के चलते बच्चों की थाली से निवाला छिनने की नौबत आ सकती है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रणवीर सिंह ने तीन अगस्त को ही जिला पूर्ति अधिकारी और जिला खाद्य विपणन अधिकारी को पत्र भेजकर खाद्यान्न उठान के निर्देश दिए थे। शासन द्वारा 17 जुलाई को जारी आदेश के क्रम में जनपद के प्राथमिक विद्यालयों के लिए 937.62 कुंतल चावल और 624.51 कुंतल गेहूं (कुल 1562.13 कुंतल) का आवंटन किया गया है।
वहीं, उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए 1248.26 कुंतल चावल और 1310.03 कुंतल गेहूं (कुल 2558.29 कुंतल) आवंटित किया गया है। जिले में मध्याह्न भोजन पकाने और वितरण की जिम्मेदारी संस्थाओं को सौंपी गई है। बीएसए ने अपने पत्र में पूर्व तिमाही का समायोजन करते हुए इन संस्थाओं के केंद्रीय रसोईघरों के लिए आवंटित खाद्यान्न की सूची भी भेजी थी। उठान न होने से इन संस्थाओं तक राशन पहुंचने का काम पूरी तरह से अटका हुआ है, जिससे भोजन वितरण ठप होने का खतरा है।
बीएसए ने आपूर्ति विभाग से अनुरोध किया था कि खाद्यान्न के अभाव में योजना किसी भी हाल में बाधित न हो, इसलिए आवंटित खाद्यान्न को संस्थाओं के केंद्रीय किचन पर तुरंत उपलब्ध कराया जाए। ठेकेदार व गाड़ियों का रूट चार्ट भी समय से उपलब्ध कराया जाए, ताकि खाद्यान्न का उठान संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और जिला समन्वयक (एमडीएम) की कड़ी निगरानी में हो सके।
खाद्यान्न का उठान करा दिया जाएगा। आरओ पत्र तैयार हो गए हैं। पत्र अभी प्राप्त हुआ है।
-कमला प्रसाद, डिप्टी आरएमओ।