मुंबई के ताज होटल और क्षत्रपति शिवाजी महाराज एयपोर्ट को बम से उड़ाने का धमकी भरा संदेश भेजने के मामले में नया मोड़ आया है। धर्मेंद्र से की गई पूछताछ में पता चला कि धर्मेंद्र के जिस मोबाइल नंबर से धमकी भरा संदेश मुंबई पुलिस को भेजा गया, वह मोबाइल फोन 13 मई को बागेश्वर धाम जाते समय मथुरा में गुम हो गया था। पुष्टि के लिए धर्मेंद्र ने 23 मई को कोतवाली में दी गई तहरीर भी पुलिस को दिखाई।
धर्मेंद्र ने मुंबई पुलिस और आईबी की टीम को रत्नेश की सिम से उसने नया मोबाइल फोन खरीदा था। खोए हुए मोबाइल फोन की लोकेशन आगरा में आने के बाद मुंबई पुलिस अब आगरा जाकर जांच कर रही है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए गांव देवर पनाखर निवासी दोनों युवकों की कोई भूमिका नहीं मिली है, फिर भी एहतियातन कोतवाली पुलिस ने दोनों को हिरासत में ही ले रखा है। गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस रत्नेश को 28 मई को ही गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि धर्मेंद्र को 29 मई को गिरफ्तार किया गया था। मुंबई पुलिस और अलीगढ़ आईबी की टीम ने दोनों से पूछताछ की।
सीओ सिकंदराराऊ डॉ. आनंद वर्मा ने बताया कि आरोपी धर्मेंद्र ने बताया कि उसका मोबाइल फोन 13 मई को मथुरा में बागेश्वरधाम जाते समय खो गया था। तीर्थ यात्रा के मद्देनजर उसने कोई कार्रवाई नहीं की। बागेश्वर धाम से लौटने के बाद धर्मेंद्र ने कोतवाली में 23 मई को मोबाइल फोन के खाेने की सूचना दी थी। इधर, धर्मेंद्र को गुम हुआ मोबाइल फोन लगातार चलता रहा।
धर्मेंद्र ने नया मोबाइल फोन खरीदकर गांव निवासी रिश्तेदार रत्नेश के नाम पर जारी सिम कार्ड लगाकर चालू किया था। धमकी प्रकरण की जांच हुई तो उसमें मोबाइल फोन के आधार पर रत्नेश का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने दोनों को दोषी मानते हुए मुंबई पुलिस की सूचना पर गिरफ्तार कर लिया। गुम हुए मोबाइल फोन की लोकेशन अब आगरा में मिल रही है। अब मुुंबई पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि आगरा में किसने धर्मेंद्र के मोबाइल फोन का प्रयोग कर धमकी भरा संदेश भेजा था।